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हादसे में न्यायाधीश की गिरफ्तारी पर रोक, मारे गए 55 वर्षीय शख्स का परिवार निराश

केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पुलिस को एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया, जिन्हें उनके 17 वर्षीय बेटे की कार से हुई घातक टक्कर में आरोपी बनाया गया है। रविवार को जयबालकृष्णन (55) की मौत हुई थी। उनकी बेटी ने कहा कि परिवार निराश है, पर कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।

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कोच्चि: कंटेनर रोड पर रविवार सुबह एक 55 वर्षीय शख्स की मौत हुई। उनके परिवार के हाथ अब ऐसा आदेश लगा है जो उसे नहीं चाहिए था।

केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पुलिस को निर्देश दिया कि वह उस अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को गिरफ्तार न करे, जिन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया है। अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पगथ ने न्यायाधीश को जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया।

पुलिस के मुताबिक दक्षिण चित्तूर निवासी जयबालकृष्णन सड़क किनारे खाने की दुकान चलाते थे। रविवार तड़के वे अपने स्कूटर से घर लौट रहे थे, जब चेरानल्लूर के मरप्पारम्बु में तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज ने उन्हें टक्कर मारी। कार न्यायाधीश के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस के संकेत के मुताबिक कार न्यायाधीश का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था।

पुलिस ने पहले भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया और नाबालिग को रविवार शाम थाने से ही जमानत मिल गई। इस फैसले के खिलाफ चेरानल्लूर थाने के बाहर विरोध हुआ। मृतक के बेटे-बेटी और कार्यकर्ताओं ने मांग की कि आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाए। वरिष्ठ अधिकारियों के दखल के बाद प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 105 लगाई, जो हत्या के बराबर न होने वाले आपराधिक मानववध से जुड़ी है। बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग को जमानत दे दी और पुलिस ने उसके पिता को आरोपी बनाया।

पुलिस ने पीटीआई को बताया कि न्यायाधीश से बुधवार को पूछताछ हुई और गुरुवार दोपहर फिर होनी थी। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।

जयबालकृष्णन की बेटी भद्रकीर्ति ने पत्रकारों से कहा, "हम निश्चित रूप से निराश हैं, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। हम अपने वकील से बात करके अगला कदम तय करेंगे। हम मामले को कानूनी तौर पर आगे बढ़ाएंगे और एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। हम लड़ते रहेंगे।"

परिवार ने कार्यवाही में शामिल होने की याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने कहा कि वह बाद में विचार करेगी।

मामला दो सवालों पर टिका है, जिन पर महीनों बहस होगी: उस सड़क पर कार की रफ्तार कितनी थी जहां एक शख्स घर लौट रहा था, और उसका जवाबदेह कौन है। नाबालिग की उम्र उसे किशोर न्याय बोर्ड के दायरे में लाती है, जबकि पंजीकृत मालिक और आरोपी के तौर पर उसके पिता की भूमिका अब उच्च न्यायालय के सामने है।