तिरुवनंतपुरम : कुछ होटलों को आबकारी मंत्री एम. लिजू या विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना बार लाइसेंस दिए जाने के आरोप पर मंगलवार को सत्ता पक्ष पर जमकर हमला बोला गया। सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पी. राजीव ने पत्रकारों से कहा, "केरल को कौन चला रहा है?"
अपने ही सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और 'प्रायोजक' राज्य चला रहे हैं और संबंधित मंत्रियों की जानकारी के बिना प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं।
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने भी बार लाइसेंस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंत्री को बताए बिना मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछली वाम मोर्चा सरकार के दौरान तीन सितारा से ऊपर के होटलों को बार लाइसेंस विस्तृत जांच के बाद ही दिया जाता था।
गोविंदन ने कहा, "अब मंत्री की जानकारी के बिना लाइसेंस दिए जा रहे हैं। हैरानी की बात यही है।"
उन्होंने क्लिफ हाउस में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की मरम्मत का आदेश मुख्यमंत्री द्वारा रद्द किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया, "पहले मंजूरी देते हैं और बाद में कोई दिक्कत आने पर आदेश वापस ले लेते हैं। यह उनका दोहरा रवैया दिखाता है।"
उन्होंने साफ किया कि बार लाइसेंस मामले की कोई भी जांच हो, सीपीआई(एम) किसी जांच से नहीं डरती।
सोमवार को आबकारी मंत्री लिजू ने कहा था कि बार को शराब लाइसेंस देते समय अधिकारियों ने "गैरजरूरी जल्दबाजी" दिखाई या नहीं, इसकी जांच होगी। उनका दावा था कि पिछली वाम सरकार ने जो मौजूदा नियम बनाए हैं, वे 24 घंटे में लाइसेंस देने की इजाजत देते हैं, उन बार को भी जो सालों से बंद थे। उन्होंने कहा कि नियमों की खामियों से यह मुमकिन हुआ और आबकारी आयुक्त को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई।
मंगलवार को सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आने की खबर नहीं है।
विपक्ष का सवाल यह है कि अगर लाइसेंस विवादास्पद साबित हुए तो जिम्मेदारी किसकी होगी। जब तक सरकार का जवाब नहीं आता, बहस जारी रहेगी।