बेंगलुरु: कर्नाटक की 33 सदस्यीय कैबिनेट में दो मंत्री पद खाली पड़े हैं — और मौजूदा एक भी पद पर महिला नहीं है। यह खाई अब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बीच पुरानी खींचतान का नया मोर्चा बन गई है। कहा जा रहा है कि इन दो सीटों के लिए दोनों खेमे अपने-अपने उमेदवार आगे कर रहे हैं।
महिला प्रतिनिधित्व की मांग महीनों से चल रही थी। सौम्या रेड्डी के कर्नाटक प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद यह और तेज हो गई। कैबिनेट में महिला न होने का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया।
दोनों खेमे एक ही दो सीटों पर अलग-अलग नाम आगे कर रहे हैं, जिससे लैंगिक प्रतिनिधित्व का सवाल अब असर, जातीय गणित और पार्टी के भीतर संतुलन की परीक्षा बन गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय या सिद्धरमैया खेमे ने अपने पसंदीदा उमेदवारों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
महिला समूहों और पार्टी नेताओं का तर्क है कि 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल में एक भी महिला न होना, प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर पार्टी की राष्ट्रीय लाइन से मेल नहीं खाता।
आगे क्या होगा, यह शिवकुमार पर निर्भर है, जिन्हें मंत्रिमंडल के अगले विस्तार से पहले प्रतिद्वंद्वी खेमों के दावे सुलझाने होंगे। ये दो सीटें नई नहीं हैं; नया मुद्दा यह है कि इनमें से कम से कम एक पर महिला को मौका देने का दबाव है। तब तक यह विवाद पार्टी बैठकों, विधानसभा और प्रचार में बार-बार उठेगा।
ये पद महीनों से खाली हैं और महिला सदस्य न होने से कांग्रेस सरकार विधानसभा में भी बचाव की स्थिति में है। पार्टी नेता भी मानते हैं कि बिना महिला सदस्य वाला मंत्रिमंडल प्रतिनिधित्व पर पार्टी की राष्ट्रीय लाइन से मेल नहीं खाता; कम से कम एक पद महिला को मिलने तक यह मुद्दा थमने वाला नहीं है।
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दो सीटें खाली, महिला एक भी नहीं; कर्नाटक कैबिनेट का विवाद शिवकुमार बनाम सिद्धरमैया की परीक्षा
कर्नाटक की 33 सदस्यीय कैबिनेट में दो मंत्री पद खाली हैं, लेकिन एक भी महिला मंत्री नहीं है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और सिद्धरमैया के खेमे अपने-अपने उमेदवार आगे कर रहे हैं, और सौम्या रेड्डी के इस्तीफे ने विवाद और भड़का दिया है।
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