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वोटर लिस्ट से 64.5 लाख नाम गायब; ज्यादातर युवा, कर्नाटक में सियासत गरम

कर्नाटक की अंतिम वोटर लिस्ट से करीब 64.5 लाख मतदाता संभावित रूप से गायब हैं; मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर का यह अनुमान 66.11 के मतदाता-जनसंख्या अनुपात पर टिका है। ज्यादातर गायब मतदाता युवा हैं। SIR के विरोध में 1 नवंबर की INDIA गठबंधन रैली को कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन मिला।

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बेंगलुरु: विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के बाद कर्नाटक की अंतिम वोटर लिस्ट जारी हो चुकी है और इसमें करीब 64.5 लाख मतदाताओं के संभावित रूप से गायब होने का अनुमान मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर ने जताया है। ज्यादातर गायब मतदाता युवा बताए जा रहे हैं।

यह आंकड़ा 66.11 के मतदाता-जनसंख्या (E-to-P) अनुपात पर आधारित है। लिस्ट मंगलवार को जारी हुई। अनुपात के मुताबिक आबादी के हिसाब से पंजीकृत मतदाताओं की संख्या कम बैठ रही है, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने का अनुमान अधिकारियों ने लगाया है।

इस पर राज्य की सियासत तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सोची-समझी योजना के तहत मतदाता घटाए जा रहे हैं। सत्ता पक्ष का जवाब है कि SIR आयोग के आदेश और कानून के दायरे में हुआ है।

इस बीच SIR की खामियों के विरोध में 1 नवंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की रैली को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बुधवार को अपना समर्थन दे दिया। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

वोटर लिस्ट का सवाल स्थानीय निकाय चुनावों से भी जुड़ा है। लिस्ट में नाम न हो तो वोट का हक नहीं बनता, यह सीधी बात है। इससे युवा मतदाताओं में बेचैनी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक SIR में परिवार के कुल सदस्यों की संख्या को आधार बनाया जाता है। जिन परिवारों ने कागजात नहीं दिए या जिनका रिकॉर्ड अधूरा रह गया, उनके नाम कटने की आशंका रहती है। लेकिन 64.5 लाख राज्य की कुल मतदाता संख्या के हिसाब से बड़ा आंकड़ा है।

आयोग के अधिकारियों ने साफ किया है कि अनुपात पर टिका यह सिर्फ अनुमान है, कटे लोगों की अंतिम संख्या नहीं। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद आंकड़े बदल सकते हैं, ऐसा भी वे कहते हैं।

विपक्ष को यह काफी नहीं लगता। कांग्रेस और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। युवा मतदाताओं के नाम बचाने के लिए अलग जांच समिति बनाने की मांग उन्होंने की है।

1 नवंबर की रैली को देखते हुए राज्य की पुलिस व्यवस्था सतर्क कर दी गई है। रैली की इजाजत पर प्रशासन का अंतिम फैसला अभी आया नहीं है।

वोटर लिस्ट का विवाद अदालत तक भी पहुंच सकता है। आयोग ने पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।