बेंगलुरु: कर्नाटक कैबिनेट में एक महिला को शामिल करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नया टकराव बन गया है, जिसने कांग्रेस सरकार की आंतरिक राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है।
माना जा रहा है कि दोनों नेता इस बात पर असहमत हैं कि यह मंत्रिपद किसे मिले। यह चर्चा मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री खेमों के बीच साख की परीक्षा में बदल गई। मतभेद की खबरें सरकार के अन्य कामकाज वाले दिन ही आईं, और किसी भी पक्ष ने औपचारिक बयान जारी करके इन मतभेदों को खारिज नहीं किया।
कर्नाटक में लंबे समय से सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था रही है, जिसमें प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख रहे शिवकुमार को शीर्ष पद का दावेदार माना जाता है। कैबिनेट में एक रिक्त स्थान को लेकर चल रही खींचतान ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि दोनों पद मिलकर कैसे काम करेंगे।
महिला मंत्री को शामिल करने से यह आलोचना दूर होने की उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। महिला समूह और पार्टी कार्यकर्ता समय-समय पर मंत्रिमंडल में अधिक महिलाओं की मांग करते रहे हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। राज्य की राजनीति पर नजर रखने वाले कई माध्यमों ने ताजा मतभेद की खबर दी है, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में बातचीत का सिलसिला और विचाराधीन नामों की पुष्टि नहीं हुई।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस घटनाक्रम से सरकार को तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन यह संकेत है कि नेतृत्व का सवाल बार-बार उठेगा। दोनों नेता पहले भी सार्वजनिक रूप से एकता पर जोर देते रहे हैं।