बेंगलुरु : 25 अक्टूबर को आरएसएस की घोषित रैलियों के लिए औपचारिक अनुमति लेने की अपील कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने की है। उन्होंने कहा कि एक ही दिन कई रैलियां निकलने से यातायात, सुरक्षा योजना और पुलिसकर्मियों की उपलब्धता पर असर पड़ता है।
राज्य में 25 अक्टूबर को आरएसएस ने रैलियों का ऐलान किया है, और सरकार का रुख है कि बड़ी रैली के लिए अनुमति जरूरी है। खरगे की मांग ने पुलिस अनुमति के सामान्य सवाल को राजनीतिक रंग दे दिया है: रैलियों और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और संघ के बीच सालों से मतभेद रहे हैं।
एक रैली का बताया गया मार्ग केम्पेगौड़ा लेआउट और कस्तूरी लेआउट से होकर शुरुआती जगह लौटेगा। अधिकारियों के मुताबिक, एक ही दिन कई जुलूसों से यातायात, सुरक्षा तैनाती और अधिकारियों की उपलब्धता पर विचार करना पड़ता है।
एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे कांग्रेस नेता हैं। उन्होंने टकराव के बजाय प्रक्रिया पर जोर दिया — आयोजकों को बाकी सब की तरह नियम मानने चाहिए।
पिछले कुछ महीनों में सार्वजनिक रैलियों और विरोध स्थलों को लेकर राज्य में तनाव रहा है। बेंगलुरु पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को फ्रीडम पार्क तक सीमित करने के निर्देश दिए, जिसकी नागरिक संगठनों ने आलोचना की।
आरएसएस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अनुमति का फैसला अब जिला प्रशासन के पास है।
राज्य में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं, और आरएसएस की रैलियों को उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। पुलिस अनुमति एक सामान्य प्रशासनिक मुद्दा है, लेकिन संगठन की रैलियों को लेकर राज्य सरकार और संगठन के बीच तनाव फिर सामने आया है। जिला प्रशासन को अनुमति देते समय मार्ग, समय और सुरक्षा व्यवस्था पर विचार करना पड़ता है।