बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के पेपर लीक मामले में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे का रास्ता साफ कर दिया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 के तहत मंजूरी दी गई है, जो लोक सेवक के शामिल होने पर राज्य की स्वीकृति अनिवार्य करती है।
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के अधिकारी हैं और अभी न्यायिक हिरासत में हैं। जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक वे केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक थे। आरोप है कि उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती के लिए आठ और नौ जनवरी को हुई परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक किया।
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने यह मंजूरी घोषित करते हुए कहा कि सरकार न भ्रष्टाचार बर्दाश्त करेगी और न दोषियों को बचाएगी।
मंजूरी मांगने वाले सीआईडी का आरोप है कि उम्मीदवारों से वसूले गए 1.52 करोड़ रुपये में से 1.30 करोड़ गंगवार को मिले। सीआईडी के मुताबिक यह निष्कर्ष आंशिक रूप से बिचौलिए बसवराज कन्नाले की पूछताछ पर आधारित है, जिन्हें अधिकारी का करीबी बताया जाता है। करीब 20 उम्मीदवारों ने कथित तौर पर 20 से 40 लाख रुपये प्रति व्यक्ति दिए। कुछ को परीक्षा से पहले बेंगलुरु के बाहरी इलाके के एक रिजॉर्ट में जवाब याद कराने के लिए ले जाया गया।
प्रवर्तन निदेशालय इन्हीं लेनदेनों की मनी लॉन्ड्रिंग जांच अलग से कर रहा है।
यह मंजूरी दोषसिद्धि नहीं है, बल्कि एक प्रक्रियागत कदम है। इससे वह कानूनी सुरक्षा हटती है जो लोक सेवक को मिलती है, और सीआईडी आरोपपत्र दाखिल कर मुकदमा शुरू कर सकती है। अदालत के फैसले तक गंगवार आरोपी ही रहेंगे।
भर्ती में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरी राज्य सरकार के लिए यह समय महत्वपूर्ण है। इस लीक ने उन अभ्यर्थियों के बीच आयोग की साख को नुकसान पहुंचाया है जिन्होंने मुट्ठी भर पदों के लिए सालों तैयारी की। अब मामला जांच फाइल से निकलकर अदालत में जा रहा है, जहां पैसे के लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड को जिरह में खरा उतरना होगा।