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61,059 नाम काटने की अर्जियां, एक में भी कारण नहीं: चुनाव अधिकारियों ने खुद भरे फॉर्म-7

कर्नाटक में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और सहायक अधिकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 61,059 फॉर्म-7 अर्जियां खुद दायर कीं, और किसी में भी कारण दर्ज नहीं है। अधिकारी ऑटो-जनरेटेड फॉर्म को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है।

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बेंगलुरु: आंकड़ा 61,059 का है। कर्नाटक की मतदाता सूची से नाम हटाने की इतनी फॉर्म-7 अर्जियां खुद चुनाव अधिकारियों ने दायर कीं, और इनमें से किसी में भी कारण दर्ज नहीं है — जबकि निर्वाचन पंजीकरण नियमावली, 1960 में कारण बताना अनिवार्य है।

इन अर्जियों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) आपत्तिकर्ता के रूप में दर्ज हैं। उनका कहना है कि "नो मैपिंग" या "लॉजिकल विसंगति" पर जारी नोटिस की सुनवाई में जब मतदाता तक पहुंच नहीं बनी, तब सिस्टम ने उनके डिजिटल हस्ताक्षर के साथ फॉर्म अपने आप बना दिए और ऐसे मतदाताओं को "अपात्र" चिह्नित कर दिया गया।

नतीजा असामान्य है। आपत्ति भी उसी चुनाव तंत्र ने दर्ज की और यह भी वही तय कर रहा है कि मतदाता सूची में रहे या नहीं। नियम 17 के मुताबिक निर्धारित अवधि के भीतर और निर्धारित प्रपत्र व तरीके से न दर्ज किया गया दावा या आपत्ति "पंजीकरण अधिकारी द्वारा खारिज की जाएगी"।

अधिकारियों के मुताबिक उन्हें निर्देश थे कि मतदाता के स्थानांतरित होने, कहीं और दोहरी प्रविष्टि होने, कम उम्र होने, मृत्यु हो जाने या भारतीय नागरिक न होने पर फॉर्म-7 भरा जाए। चूंकि फॉर्म ऑटो-जनरेट हो रहे थे, कारण खाली रह गया। रिकॉर्ड में कुछ न होने से न मतदाता जान सकता है कि उसका नाम क्यों काटा गया, न सूची देखने वाला कोई यह जांच सकता है कि हटाना जायज था या नहीं।

समय-रेखा चौंकाने वाली है। 24 अगस्त से 23 सितंबर की दावा-आपत्ति अवधि में ऐसी सिर्फ 192 अर्जियां आईं। 24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच 60,800 से ज्यादा दर्ज हुईं। 22 अक्टूबर, यानी दावा-आपत्ति निपटाने के आखिरी दिन, अधिकारियों ने 10,105 अर्जियां भरीं। एक दिन पहले 10,314। 17 और 19 अक्टूबर को 11,132 और 11,760।

बीबीएमपी दक्षिण जिले में अधिकारियों की सबसे ज्यादा 10,374 अर्जियां थीं, जहां कुल 17,491 अर्जियां मिलीं। बोम्मनहल्ली विधानसभा क्षेत्र में 5,757 में से 4,095 अधिकारियों ने भरीं। कम से कम 26 विधानसभा क्षेत्रों में अधिकारियों की अर्जियां मतदाताओं और तीसरे पक्ष से ज्यादा रहीं।

कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है। इसमें सिर्फ 23 सितंबर तक मिली अर्जियों पर विचार होना था। फिर भी नमूना जांच में पाया गया कि समय-सीमा के बाद दायर अर्जियों में नामित मतदाताओं के नाम पहले ही काटे जा चुके थे।

विशेष गहन पुनरीक्षण में मसौदा सूची से 1.07 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए, ज्यादातर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने या अनुपस्थित चिह्नित होने के आधार पर।

24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने 1,70,442 फॉर्म-7 अर्जियां बताईं, लेकिन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर समेकित फॉर्म-10 रिकॉर्ड में सिर्फ 1,56,634 मिलीं — 13,808 का अंतर।

सामूहिक फॉर्म-7 भरने पर 10 एफआईआर दर्ज हुई हैं। चित्तापुर में एक मतदाता की 40 अर्जियां खारिज हुईं और वहां पहली बार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 लागू की गई।