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सीसीबी बोली, सिद्धरामैया पर बना स्टिंग वीडियो फर्जी, सुराग कर्नाटक से बाहर

बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया पर बना वायरल स्टिंग वीडियो यौन शोषण के मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित लगता है और अब तक के बयान व सबूत उसमें दिखाई गई घटना को साबित नहीं करते। फ्रीलांस कंटेंट क्रिएटर रितेश पांडेय को 24 अक्टूबर को एनसीआर से गिरफ्तार किया गया था।

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बेंगलुरु: वीडियो एक पूर्व मुख्यमंत्री को नुकसान पहुंचाने के लिए बना था। पुलिस अब कहती है कि उसके पीछे कुछ भी नहीं था।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया की शिकायत पर जांच कर रही सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को विज्ञप्ति में कहा कि रिकॉर्डिंग में यौन शोषण के मनगढ़ंत आरोप लगते हैं और अब तक दर्ज बयान तथा जुटाए गए सबूत उसमें दिखाई गई घटना की पुष्टि नहीं करते।

वीडियो में दिखने वाले सभी लोगों से पूछताछ हो चुकी है। विज्ञप्ति के मुताबिक, "अब तक दर्ज बयान और जुटाए गए सबूत प्रथम दृष्टया बताते हैं कि रिकॉर्डिंग में जिन लोगों का जिक्र है, उन पर लगाए गए या संकेत किए गए आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं।"

रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया गया मूल मोबाइल फोन जब्त कर उसकी प्रामाणिकता और अखंडता जांचने के लिए फॉरेंसिक परीक्षण को भेज दिया गया है। रिपोर्ट आनी बाकी है और पुलिस ने मामले को बंद नहीं माना है।

फ्रीलांस सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर रितेश पांडेय को 24 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से इस आरोप में गिरफ्तार किया गया कि उसने वह फोन जुटाया, जिससे वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया गया। सीसीबी ने कहा कि इस गिरफ्तारी का दिल्ली में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से संबंध हो सकता है। उसने कहा, "इन संभावित संबंधों की प्रकृति, विस्तार और प्रासंगिकता की जांच हो रही है।"

समयरेखा भी इस पहेली का हिस्सा है। वीडियो कथित रूप से 2023 में रिकॉर्ड हुआ और उसमें 2011 की घटना का जिक्र है। जांचकर्ता यह देख रहे हैं कि कथित घटना के करीब 12 साल बाद यह क्यों रिकॉर्ड हुआ, इसमें कौन शामिल थे और उनका मकसद क्या था, और क्या रिकॉर्डिंग जानबूझकर रची गई, गढ़ी गई या उसमें छेड़छाड़ की गई।

डिजिटल सुराग छिपाने की कोशिशें भी दिखती हैं। वीडियो वीपीएन, नकली फोन नंबरों और दूसरे तरीकों से अनाम खातों के जरिए अपलोड हुआ और सुराग कर्नाटक से बाहर की जगहों की ओर जाते हैं। पुलिस ने कहा कि सुराग बताते हैं कि इसका प्रसार राज्य में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को बदनाम करने की जानबूझकर कोशिश का हिस्सा हो सकता है।

कुछ लोगों की पहचान आगे की जांच के लिए हुई है और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। जांच यह भी देख रही है कि सोशल मीडिया तक पहुंचने से पहले वीडियो किन हाथों से गुजरा।

एक बात अलग से ध्यान खींचती है। वीडियो में दिखने वाली महिला ने कथित रूप से जांचकर्ताओं से कहा कि उसने सिद्धरामैया को कभी नहीं देखा और उसने दूसरों के कहने पर बयान दिए।

अभी कोई आरोप पत्र दायर नहीं हुआ है और गिरफ्तार लोगों पर लगे आरोप अभी आरोप ही हैं।