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कार्बन फिर बाजार में, इस बार जेन-ज़ी पर निशाना

घरेलू हैंडसेट ब्रांड कार्बन ने गुरुवार को कहा कि वह कई साल बाद भारत के स्मार्टफोन बाजार में वापसी कर रहा है और जेन-ज़ी तथा कंटेंट क्रिएटर्स के लिए डिवाइस लाएगा. कंपनी ने लॉन्च की तारीख या कीमत नहीं बताई है, लेकिन रिबेल 5जी नाम के फोन का टीजर शुरू कर दिया है.

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नई दिल्ली: कार्बन उसी दुकान पर लौट रहा है जहां से वह करीब एक दशक पहले हटा था. घरेलू हैंडसेट ब्रांड ने गुरुवार को कहा कि वह भारत के स्मार्टफोन बाजार में फिर उतर रहा है और उसकी नई रेंज युवा खरीदारों तथा कंटेंट क्रिएटर्स के लिए होगी, उन फीचर-फोन ग्राहकों के लिए नहीं जिन्हें वह पहले बेचता था.

कंपनी ने बयान में कहा, "कार्बन, 15 साल से ज्यादा उद्योग मौजूदगी वाला भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड, भारत के स्मार्टफोन बाजार में अपनी मौजूदगी फिर स्थापित करते हुए नया अध्याय शुरू कर रहा है."

दांव सीधे कीमत पर है. कार्बन की मूल कंपनी जैना ग्रुप के मुख्य कार्यकारी और प्रबंध निदेशक प्रदीप जैन का तर्क है कि बाजार चुपचाप महंगा हो गया है. उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों में भारत के फोन बाजार की कीमत चढ़ी है जबकि खरीदने वाले भारतीयों की संख्या स्थिर रही, जो सबूत है कि हमारे कुछ सबसे अहम खरीदार सेवा पाने के बजाय कीमत से बाहर हो रहे हैं."

जैन ने नई लाइन को आत्म-अभिव्यक्ति से जोड़ा. उन्होंने कहा, "यह युवा देश है, और इसके जेन-ज़ी के लिए कंटेंट अब सिर्फ रचना नहीं, एक नजरिया जताने का जरिया है, और डिवाइस उसका कैनवास है." उन्होंने कहा कि कंपनी तकनीक तक पहुंच को आम बनाने पर काम करेगी.

कंपनी ने जो नहीं बताया है वह भी अहम है. कोई निवेश आंकड़ा नहीं, कोई प्रोडक्ट रोडमैप नहीं, कोई लॉन्च तारीख नहीं और कोई कीमत नहीं. हालांकि कार्बन ने अमेज़न पर एक माइक्रोसाइट के जरिए कार्बन रिबेल 5जी नाम के डिवाइस का टीजर जारी किया है. स्पेसिफिकेशन, डिजाइन और उपलब्धता अब भी सामने नहीं आए हैं.

कार्बन दिल्ली की जैना ग्रुप और बेंगलुरु के यूटीएल ग्रुप के संयुक्त उद्यम के रूप में बना था, और इसका पहला एंड्रॉयड स्मार्टफोन कार्बन ए1 साल 2011 में आया था. आईपीएल के शुरुआती सीजन में क्रिकेट के जरिए इसने पहचान बनाई और बाद में स्मार्टफोन कारोबार से हट गया.

इसकी वापसी ऐसे बाजार में हो रही है जहां भारतीय ब्रांडों का एक नया दौर बजट हिस्से में हाथ आजमा रहा है. मिवी, फायरबोल्ट और एआई प्लस ने पिछले एक साल में फोन उतारे हैं, ज्यादातर ₹20,000 से नीचे.

नीति भी इसी दिशा में धक्का दे रही है. सरकार की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर है, और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव कह चुके हैं कि 2028 तक पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित फोन आ सकते हैं. लंदन की नथिंग ने अपना सब-ब्रांड सीएमएफ भारत की कंपनी में बदल दिया है, जिसमें ऑप्टिमस ने बहुमत हिस्सा लिया है.

सवाल यह है कि कार्बन जाना-पहचाना लोगो बिक्री में बदल पाएगा या नहीं. बजट हिस्सा भरा हुआ है, मार्जिन पतले हैं, और खरीदार अब फोन को ब्रांड की याद के बजाय कैमरा, बैटरी और सॉफ्टवेयर सपोर्ट पर परखते हैं.