मुंबई: मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर 500 करोड़ रुपये के आरोप के बाद शिवसेना ने दो मोर्चों पर पलटवार किया — जरांगे पाटील की संपत्ति की जांच और मानहानि का केस।
शिवसेना के दशहरा मेले में बोलते हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामदास कदम ने जरांगे को 'बेईमान' कहा और उनके वित्तीय मामलों की जांच की मांग की। कदम ने कहा, 'जरांगे, तुमने एकनाथ शिंदे और 500 करोड़ की बात की; अगर तुमने एकनाथ शिंदे को बर्बाद करने की कोशिश की, तो यह मराठा समाज पीछे नहीं हटेगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि जरांगे उपवास के दौरान बाथरूम में जाकर चुपके से खाते थे। महंगी गाड़ियां और पैसा कहां से आया, यह सवाल भी कदम ने उठाया। 'शिंदे साहेब, उनकी जांच कराइए,' वे बोले।
शिंदे का बचाव करते हुए कदम ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने मराठा समाज को 10 फीसदी आरक्षण दिया है। 'एकनाथ शिंदे शिवसैनिकों और मराठा समाज के देवता हैं। उनके खिलाफ बोलेंगे तो समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।'
जरांगे ने मंगलवार को बीड जिले के नारायणगढ़ में दशहरा रैली में यह आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि शिंदे ने भाजप के एक वरिष्ठ नेता से कहा था कि उन्होंने आंदोलन के दौरान जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिए। जरांगे ने कहा, 'पिछले महीने अंतरवाली सराटी में मेरे उपवास के आठवें दिन कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मुझे बताया कि शिंदे ने पैसे देने का दावा किया था। मेरे पास सबूत हैं।' उन्होंने शिंदे को चुनौती दी कि वे दशहरा मेले में इस मुद्दे पर बोलें।
जरांगे ने मांग की कि शिंदे साफ करें कि उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे के जरिए पैसे दिए जाने का दावा झूठा है या नहीं।
शिवसेना नेता संजय लखे पाटील ने जरांगे से 1 रुपया हर्जाना मांगते हुए मानहानि का केस करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि जो भाजप नेता यह जानकारी दे रहे हैं, उनका नाम बुधवार शाम तक बताइए। लखे पाटील ने वीडियो बयान में कहा, 'जरांगे भाजप के भीतर किसी के कहने पर बोल रहे हैं।'
कदम ने भी जरांगे को भाजप नेता का नाम बताने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यह भाजप और शिवसेना के बीच दरार डालने की कोशिश हो सकती है।