छत्रपति संभाजीनगर : मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने गुरुवार सुबह 11 बजे पत्रकार परिषद लेकर अपने खिलाफ लगे 500 करोड़ रुपये के आरोपों का जवाब एक ऑडियो क्लिप से दिया. उनका दावा है कि यह बीजेपी के दायरे की कथित आंतरिक बातचीत है.
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जरांगे को जांच एजेंसियों के पास सबूत पेश करने की चुनौती दी थी. वह चुनौती स्वीकारते हुए जरांगे ने कहा कि वे किसी के कहने पर नहीं बोलते. "शिंदे साहब ने सबूत मांगे थे. आज मैं मीडिया के सामने वे पेश कर रहा हूं," उन्होंने कहा.
जरांगे के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मराठा समाज के नेताओं को आगे करके उनका असर घटाने और इसके लिए निजी स्तर पर फंड जुटाने की बातचीत इस क्लिप में है. "तीन साल से मेरे और मराठा आरक्षण आंदोलन के खिलाफ सोची-समझी साजिश रची जा रही है," उन्होंने आरोप लगाया.
जरांगे ने कहा कि उन्होंने बीजेपी से पैसे नहीं लिए और ना किसी को दिए. उन्होंने 500 करोड़ के प्रचार को बदनाम करने की चाल बताया. "मैं किसी का राजनीतिक प्लेटफॉर्म नहीं बनता. मैं मराठा समाज के लिए बोलता हूं," उन्होंने कहा.
शिंदे गुट के नेताओं पर पलटवार करते हुए जरांगे ने कहा कि बड़े नेताओं को मामला समझना चाहिए था. "अक्ल पर असर पड़ने जैसी बात नहीं करनी चाहिए," उन्होंने कहा. ऑडियो क्लिप की निष्पक्ष जांच की मांग भी उन्होंने की.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के सांसद संजय राऊत ने भी जरांगे का पक्ष लिया. "एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र का स्वाभिमान लॉरेंस बिश्नोई के पैरों पर गिरवी रखा है," राऊत ने मुंबई में कहा. जरांगे महाराष्ट्र के सपूत हैं और भ्रष्टाचार के मुखौटे खोलेंगे तो जनता उनकी आभारी रहेगी, उन्होंने कहा.
दूसरी ओर, ओबीसी नेता नवनाथ वाघमारे ने जरांगे और शिंदे दोनों की नार्को टेस्ट और ईडी जांच की मांग की. "अगर 500 करोड़ का लेन-देन हुआ है तो दोनों की संपत्ति जांची जानी चाहिए," उन्होंने कहा. सत्ताधारी नेता इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं, इस पर महाराष्ट्र की नजर है.