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2029 तक चार लॉन्च पैड, दो महीने में गगनयान का पहला टेस्ट: ISRO का पूरा खाका

ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने रविवार को कहा कि भारत 2029 तक चार कामकाजी लॉन्च पैड बनाएगा और तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में 2,000 एकड़ का SSLV परिसर होगा। अगले दो महीने में गगनयान का पहला मानवरहित टेस्ट प्रस्तावित है, जिसके बाद दो और होंगे। चंद्रयान-5 जापान के साथ संयुक्त चंद्र मिशन होगा, जिसमें 350 किलो का रोवर जाएगा।

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नई दिल्ली: भारत के पास 2029 तक चार कामकाजी लॉन्च पैड होंगे और तमिलनाडु में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के लिए 2,000 एकड़ का अलग परिसर होगा। यह जानकारी ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने रविवार को दी।

राजधानी में एक कार्यक्रम में बोलते हुए नारायणन ने कहा कि कुलसेकरपट्टिनम का परिसर उपग्रह प्रक्षेपण की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि ISRO टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए स्टार्टअप और निजी कंपनियों को सहयोग देगा, लेकिन खुद सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था बना रहेगा।

मानव अंतरिक्ष उड़ान पर उन्होंने कहा कि गगनयान का पहला मानवरहित टेस्ट अगले दो महीने में प्रस्तावित है और उसके बाद दो और मानवरहित टेस्ट होंगे; तब जाकर अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे। यह कार्यक्रम कई बार पीछे खिसका है, और नारायणन की समय-सीमा के मुताबिक अगला पड़ाव इसी वित्त वर्ष में है।

उन्होंने चंद्रयान-5 की योजना का भी ऐलान किया। यह जापान के साथ संयुक्त चंद्र मिशन होगा, जिसमें 350 किलो का रोवर भेजा जाएगा। भारत का पिछला चंद्र लैंडिंग मिशन चंद्रयान-3 था, जिसने अगस्त 2023 में दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडर और रोवर उतारा था।

लॉन्च पैड का हिसाब इसलिए मायने रखता है, क्योंकि भारत के दो चालू स्पेसपोर्ट, श्रीहरिकोटा और कुलसेकरपट्टिनम, बढ़ते लॉन्च कैलेंडर के लिए सीमित स्लॉट दे पाते हैं। इस कैलेंडर में व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण, गगनयान श्रृंखला और भारी पृथ्वी अवलोकन मिशन शामिल हैं। 2029 तक चार पैड मौजूदा क्षमता को लगभग दोगुना कर देंगे।

नारायणन की बातें ऐसे दिन आईं, जब सरकार की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं कई मोर्चों पर सामने आईं। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में भारतीय वायुसेना के 'विंग्स ओवर गंगेस' एयर शो में हिस्सा लिया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम का आखिरी दिन था, जो वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर आयोजित था।

निजी क्षेत्र की बात करें तो ISRO उपग्रह और लॉन्च व्हीकल बनाने के लिए भारतीय कंपनियों को तकनीक हस्तांतरित करता रहा है और कह चुका है कि देश की मुख्य अंतरिक्ष एजेंसी के तौर पर अपनी भूमिका छोड़े बिना यह सिलसिला जारी रहेगा।