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इंटरनेट नहीं, फिर भी चलेगा: 11 भाषाओं में ऑफलाइन काम करने वाले भारतीय एआई मॉडल

इंडियाएआई मिशन के तहत दो स्टार्टअप ने बुधवार को नई दिल्ली में स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल पेश किए। ज़ेंटेईक्यू के धीर 2बी व धीर 5बी और सोकेट लैब्स का ईकेए-1 बिना इंटरनेट के चलते हैं। ये मॉडल रक्षा, सरकारी विभागों और शिक्षा के लिए बनाए गए हैं।

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नई दिल्ली: जिस एआई मॉडल को जवाब देने के लिए क्लाउड चाहिए, वह रक्षा प्रतिष्ठान में, कमजोर ब्रॉडबैंड वाले जिला दफ्तर में या एक ही कंप्यूटर वाले स्कूल में किसी काम का नहीं होता। बुधवार को राजधानी में पेश तीन मॉडल ठीक ऐसे ही कमरों के लिए बनाए गए हैं।

ज़ेंटेईक्यू एआईटेक इनोवेशन्स ने धीर 2बी और धीर 5बी पेश किए, और सोकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च ने ईकेए-1। तीनों इंडियाएआई मिशन के तहत बने हैं। कंपनियों का दावा है कि ये कई भारतीय भाषाएं संभालते हैं और बिना इंटरनेट कनेक्शन के चल सकते हैं।

पेशकश साफ है — दस्तावेजों पर आधारित ऑटोमेशन। यानी मॉडल उसी फाइल से जवाब देता है जो उसके सामने रखी है, न कि ट्रेनिंग के दौरान देखी गई किसी चीज से। इसमें जानकारी निकालना, नागरिक सेवाएं और कंपनियों के काम शामिल हैं। रक्षा, सरकार, उद्योग और शिक्षा के अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और साइबर सुरक्षा भी इन क्षेत्रों में गिनाई गई हैं।

सरकारी खरीदारों के लिए असली बात ऑफलाइन चलने की ही है। जो विभाग दस्तावेज विदेशी सर्वर पर नहीं भेज सकते, उनके पास दो ही रास्ते थे — खुद बनाओ या बिना रहो। जो मॉडल बंद (एयर-गैप्ड) मशीन के अंदर चलता है, वह खरीद का सवाल ही बदल देता है: "कौन सा क्लाउड" की जगह "कौन सा लैपटॉप"।

धीर 2बी और 5बी में लगे 2बी और 5बी पैरामीटर संख्या हैं, यानी मॉडल के आकार का मोटा पैमाना। छोटे मॉडल साधारण हार्डवेयर पर चलते हैं और यही ऑफलाइन इस्तेमाल को मुमकिन बनाता है। ईकेए-1 का आकार और बनावट सार्वजनिक नहीं की गई।

जो चीजें अब तक जारी नहीं हुईं — लाइसेंस की शर्तें, मॉडल कहां से डाउनलोड होंगे, भारतीय भाषाओं में बेंचमार्क स्कोर और ट्रेनिंग डेटा। इन्हीं बातों से तय होता है कि कोई जिला दफ्तर इसे लगा भी सकता है या नहीं, और कोई स्टार्टअप इस पर प्रोडक्ट बना सकता है या नहीं।

भारत का एआई अभियान अब तक ऐलानों में ज्यादा और तैयार उत्पादों के मामले में कम रहा है। बिना कनेक्शन चलने वाले तीन मॉडल ठोस कदम हैं, और जांचे जा सकने वाले भी। अगले कुछ हफ्ते बताएंगे कि ये डेमो से बाहर टिकते हैं या नहीं।