बेंगलुरु: देश के अंतरिक्ष नियामक और प्रोत्साहन संस्थान इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) ने अंतरिक्ष तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए छह निजी कंपनियों को सीड ग्रांट के लिए चुना है. हर चुनी गई कंपनी को एक करोड़ रुपये तक का ग्रांट मिल सकता है.
फरवरी 2026 में इन-स्पेस की सीड फंड योजना के तहत घोषित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 6 करोड़ रुपये तक है. मकसद है स्टार्टअप और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को अंतरिक्ष के लिए AI आधारित समाधान बनाने में मदद करना.
चुने गए प्रोजेक्ट अंतरिक्ष की सबसे मुश्किल चुनौतियों पर काम करेंगे — सटीक लैंडिंग, अंतरिक्ष की स्थिति की जानकारी, मलबे की पहचान, उपग्रह की सर्विसिंग और ईंधन भरना, स्वचालित टारगेट पहचान और अंतरिक्ष यान का खुद से संचालन. अग्निकुल कॉसमॉस सटीक लैंडिंग के लिए विजन आधारित टर्मिनल नेविगेशन मॉड्यूल बनाएगी. दिगंतरा ने एजेंटिक आरएसओ इवैल्यूएशन सूट (एरेस) पेश किया है. EON स्पेस लैब्स एफपीजीए आधारित एज AI से बुद्धिमान ऑप्टिकल पेलोड बनाएगी, जिसका मकसद वास्तविक समय में अंतरिक्ष की स्थिति और मलबे की पहचान करना है.
ऑर्बिटएड एयरोस्पेस कक्षा में सर्विसिंग और ईंधन भरने के लिए मशीन लर्निंग आधारित पोज अनुमान एल्गोरिदम पर काम करेगी. किसी दूसरे यान के पास जाते समय, डॉकिंग या सर्विसिंग में उसकी सापेक्ष स्थिति और दिशा जानना जरूरी होता है. ऑम्निप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज स्वचालित टारगेट पहचान पर काम करेगी, जिसका इस्तेमाल रक्षा और डॉकिंग में हो सकता है. टेकमीटूस्पेस अटीट्यूड डिटरमिनेशन एंड कंट्रोल सिस्टम (एडीसीएस) का AI आधारित आधुनिकीकरण करेगी.
छह ग्रांट पाने वाली कंपनियों के अलावा फूको प्रा. लि. और आकाशवेदा टेक्नोलॉजीज को मेंटरशिप और तकनीकी सहायता के लिए चुना गया है. फूको टकराव से बचने की स्वायत्त प्रणाली पर, जबकि आकाशवेदा यान और जमीन दोनों के कामकाज के AI आधारित प्रबंधन पर काम करेगी. दोनों को इन-स्पेस और इसरो की सुविधाओं में तकनीक जांचने का मौका मिलेगा और अंतरिक्ष विभाग से तकनीक हस्तांतरण पर भी विचार होगा.
इन-स्पेस के अधिकारियों ने पहले कहा था कि अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 8.4 अरब डॉलर से 44 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है.