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एक आइरिस स्कैन, चार पहचान: IBPS पासिंग रैकेट में कोर्ट ने जमानत खारिज की

मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक भर्ती रैकेट में गिरफ्तार एक सेवारत जीएसटी इंस्पेक्टर और एक विधि छात्र की जमानत याचिका खारिज की है। आरोप है कि 46 पासिंग कराने वालों ने 135 उम्मीदवारों की परीक्षा दी। अदालत ने कहा कि जांच 2020 से 2024 के 22 आईबीपीएस परीक्षाओं तक फैली है।

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मुंबई: मामला एक मिलान पर टिका है। जिस शख्स ने चार अलग-अलग उम्मीदवारों की परीक्षा दी, उसका आइरिस स्कैन सीबीआई के मुताबिक एक ही व्यक्ति का निकला — एक सेवारत केंद्रीय जीएसटी इंस्पेक्टर।

सोमवार को विशेष न्यायाधीश पी.बी. घुगे ने कोलकाता में तैनात 42 वर्षीय जीएसटी इंस्पेक्टर राजीव रंजन और 32 वर्षीय अभिषेक कुमार उर्फ रोशन की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों 8 अक्टूबर को गिरफ्तार हुए थे।

सीबीआई का आरोप है कि रंजन ने चार उम्मीदवारों — मनीष कुमार, अमित कुमार, ऋषभ राय और करण कार्तिक — की जगह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा तथा दस्तावेज सत्यापन में पासिंग की और उनमें से दो की जगह साक्षात्कार में भी गए। एजेंसी ने बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) से मिली तस्वीरें, अंगूठे के निशान और आइरिस स्कैन पर भरोसा किया। अदालत को बताया गया कि रंजन का आइरिस स्कैन उसी व्यक्ति से मेल खाता है जो चारों की जगह परीक्षा में बैठा।

पूरे मामले में सीबीआई का कहना है कि 46 पासिंग कराने वालों ने 135 उम्मीदवारों की जगह आईबीपीएस परीक्षाएं दीं और उन्हें यूको बैंक, बिहार ग्रामीण बैंक तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कई जगह नौकरी दिलाई।

अदालत ने दर्ज किया कि जांच 2020 से 2024 के बीच हुई 22 परीक्षाओं तक फैली है, जिनमें 135 उम्मीदवारों को कथित तौर पर पासिंग के जरिए नौकरी मिली, और एजेंसी अन्य पासिंग कराने वालों, चयनित उम्मीदवारों, सरकारी कर्मचारियों तथा निजी संस्थाओं की भूमिका भी जांच रही है।

न्यायाधीश ने रंजन की याचिका खारिज करते हुए कहा, "आवेदक जांच के इस चरण पर जमानत का हकदार नहीं है," और आरोपों की गंभीरता तथा जांच के स्तर का हवाला दिया। कुमार की याचिका पर भी यही रुख रहा।

बचाव पक्ष ने कहा था कि सरकारी कर्मचारी होने के नाते रंजन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पूर्व स्वीकृति जरूरी थी, और कुमार की हिरासत जारी रहने से उनका एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होगा क्योंकि अंतिम विधि परीक्षाएं नजदीक हैं। दोनों ने कहा कि उन्होंने जांच में सहयोग किया और सारे सबूत एजेंसी के पास हैं। अदालत ने यह दलील भी खारिज की कि यह उन्हीं तथ्यों पर तीसरी एफआईआर है, और कहा कि भोपाल के पुराने मामले मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक में भर्ती उम्मीदवारों से जुड़े थे, जबकि यह मामला कई राज्यों के 135 उम्मीदवारों का है।

मामला आईबीपीएस की शिकायत से शुरू हुआ, जिसने 2020 से 2024 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं का विश्लेषण करने के बाद पासिंग की आशंका जताई। संस्थान ने 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की, जिनमें 180 पहले से सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में कार्यरत थे।