गुरुग्राम: निजी बिजली वितरण कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में हरियाणा के करीब 40,000 बिजली कर्मियों ने बुधवार रात 10 बजे से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है. गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूह, रेवाड़ी, सोनीपत, झज्जर, करनाल और अंबाला जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है.
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने एलेवन पावर नाम की निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूह जिलों में 25 साल के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस दिया है. कर्मचारी संगठनों ने इसे पीछे के दरवाजे से निजीकरण बताया है.
हड़ताल शुरू होने के 12 घंटे के भीतर ही बिजली विभाग को 3,000 से ज्यादा शिकायतें मिलीं. गुरुग्राम के कई सेक्टरों और कॉलोनियों में लंबे समय तक बिजली गुल रही. इन्वर्टर का बैकअप खत्म होने पर लोग जनरेटर पर निर्भर हो गए, वहीं कई इलाकों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई.
रेवाड़ी में पल्हावास और आसपास के गांवों के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 352 जाम करके विरोध किया. फरीदाबाद के न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप-2 इलाके में भी निवासियों ने बिजली बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया.
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार एचईआरसी के फैसले के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करेगी और अमल पर रोक मांगेगी. हड़ताल को अनावश्यक बताते हुए उन्होंने कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की.
मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने भी कर्मियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है. हड़ताल 24 अक्टूबर तक चलेगी.
हड़ताल से गुरुग्राम के औद्योगिक इलाकों में उत्पादन भी प्रभावित हुआ. दौलताबाद, कादीपुर, बसई और सेक्टर 37 की इकाइयों को भी बिजली संकट झेलना पड़ा. प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष दीपक मैनी ने कहा कि सेक्टर 37 में बुधवार रात 10 बजे से बिजली नहीं थी, और लंबी कटौती से उत्पादन तथा डिलीवरी प्रभावित हो सकती है.