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गोकुल चुनाव में बंटी पाटिल का दम : 25 में से 13 सीटें, तीनों सत्ताधारी दलों को झटका

कोल्हापुर जिला दूध उत्पादक संघ के चुनाव में कांग्रेस विधायक सतेज 'बंटी' पाटिल के पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं. भाजप, शिवसेना और राकांपा, तीनों सत्ताधारी दलों के खिलाफ यह जीत मिली.

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कोल्हापुर: महाराष्ट्र का सबसे बड़ा दूध संघ. सालाना कारोबार करीब 3,966.28 करोड़ रुपये. और सत्ता एक बार फिर कांग्रेस के हाथ में.

कोल्हापुर जिला दूध उत्पादक संघ — यानी गोकुल — के चुनाव में कांग्रेस विधायक सतेज 'बंटी' पाटिल के पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं. नतीजा सोमवार (19 अक्टूबर) को आया. काउंटिंग से पहले भाजप ने दावा किया था कि उसे सभी 25 सीटें मिलेंगी. काउंटिंग के दिन नतीजे कुछ घंटे देर से आए, लेकिन आखिर में पाटिल ही जीते.

गोकुल का 2024-25 का कारोबार 3,966.28 करोड़ रुपये रहा. कोल्हापुर और आसपास के करीब 4.41 लाख दूध उत्पादक इस संघ से जुड़े हैं. 16 मार्च 1963 को सहकारी डेयरी प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ गोकुल राज्य की सहकार राजनीति में बड़ा दांव है.

पाटिल ने इस चुनाव में तीनों सत्ताधारी दलों — भाजप, शिवसेना और राकांपा — से मुकाबला किया. वे कांग्रेस के कोल्हापुर जिला अध्यक्ष और एमएलसी हैं. दिवंगत शिक्षण सम्राट डी. वाई. पाटिल के बेटे हैं; नवी मुंबई का क्रिकेट स्टेडियम उन्हीं के नाम पर है.

गोकुल की यह पहली लड़ाई नहीं है. 2021 में महाविकास आघाडी के सत्ता में रहते और टूट से पहले पाटिल और अविभाजित राकांपा के हसन मुश्रीफ ने यह चुनाव जीता था. तब पूर्व विधायक महादेवराव महाडिक और दिवंगत पूर्व विधायक पी. एन. पाटिल का 30 साल का दबदबा खत्म हुआ. दोनों ने वादा किया था कि गोकुल सिर्फ दूध उत्पादकों के हित में चलेगा. लेकिन एक साल के भीतर ही राज्य के सियासी समीकरण बदल गए. शिवसेना और राकांपा में टूट के बाद मुश्रीफ भाजप के करीब चले गए. सहकार क्षेत्र में पाटिल से रिश्ते सार्वजनिक तौर पर बनाए रखने की बात कही, पर भाजप के दबाव में उन्हें वह रुख छोड़ना पड़ा.

पाटिल का विधायकी सफर दो दशक से पुराना है. 2004 में वे करवीर से निर्दलीय जीते. पांच साल बाद कोल्हापुर दक्षिण से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने. नवंबर 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने उन्हें गृह राज्यमंत्री बनाया. 2014 में कोल्हापुर दक्षिण से हार के बाद कोल्हापुर के महाडिक परिवार से रिश्ते बिगड़े और वह टकराव आज भी जारी है. 2019 में महाविकास आघाडी के सत्ता में आने पर वे फिर राज्यमंत्री बने.

2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार और उससे पहले लोकसभा में मिली कामयाबी के बाद गोकुल की जीत पार्टी के लिए राहत है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बातचीत और चुनाव प्रबंधन में पाटिल का हुनर राज्य इकाई के काम आ सकता है.

'मेरा अगला लक्ष्य 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद की दो सीटें महाविकास आघाडी के लिए जिताना है,' चुनाव के बाद पाटिल ने कहा.