पणजी: गोवा में अनुसूचित जनजाति का आरक्षण अब भी अदालत के दरवाजे पर अटका है, और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की नजर अब सबसे ऊंची अदालत पर टिकी है।
सावंत ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट जाना भी शामिल है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले गोवा विधानसभा में एसटी आरक्षण मुमकिन हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा अड़चनों से निकलने के लिए दूसरे कानूनी रास्ते भी तलाश रही है।
उन्होंने बताया कि गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान उन्होंने यह मामला खुद उठाया।
सावंत ने कहा, "2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एसटी आरक्षण दिलाने की हर मुमकिन कोशिश हम कर रहे हैं।"
मुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया कि कौन सा अदालती आदेश या कानून की कौन सी धारा रास्ते में खड़ी है, और न ही यह कि जिस वैकल्पिक रास्ते की जांच चल रही है उसका स्वरूप क्या होगा।
उनके बयान से सिर्फ एक बात साफ होती है — वह घड़ी जिसके साथ उन्हें चलना है। चुनावी कैलेंडर के मुताबिक गोवा 2027 की शुरुआत में मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के साथ मतदान करेगा। 40 सदस्यीय सदन के ढांचे में कोई भी बदलाव अधिसूचना से काफी पहले लागू करना होगा।
विधानसभा में आरक्षण का मतलब होगा कि कौन सी सीट आरक्षित रहेगी और कौन सी सामान्य, इसका नया बंटवारा। यह बदलाव हर दल के टिकट के गणित को छूता है।
सावंत का बयान ऐसे दिन आया जब राज्य की राजनीतिक नजर पहले से चुनाव की तैयारी पर टिकी है। उन्होंने कोई समयसीमा नहीं दी, कोई कानूनी राय सामने नहीं रखी और कोशिश के अलावा कोई भरोसा नहीं दिया।
गुरुवार की मुलाकात में क्या बात हुई, इस पर गृह मंत्रालय की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है।
फिलहाल फाइल वहीं पड़ी है जहां कुछ समय से है — राज्य के इरादे और अदालत की इजाजत के बीच।