पणजी: गोवा की मांद्रेम विधानसभा सीट से भाजप के पुराने प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मीकांत पार्सेकर और दयानंद सोपटे साथ आ गए हैं. इससे गठबंधन सहयोगी महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के साथ तनाव बढ़ गया है. अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव हैं.
पार्सेकर ने मांद्रेम का लगातार तीन बार प्रतिनिधित्व किया था. 2022 में भाजप ने सोपटे को टिकट दिया तो पार्सेकर पार्टी छोड़ गए. दोनों चुनाव हार गए और एमजीपी के जीत अरोलकर जीते. अब पार्सेकर और सोपटे ने पुरानी कड़वाहट भुलाकर अरोलकर के खिलाफ मोर्चा बना लिया है. पार्सेकर ने कहा, "फैसला पार्टी पर छोड़ता हूं."
एमजीपी नेता सुदिन ढवलीकर ने मांद्रेम पर विवाद को हल्का बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वे के मुताबिक मार्कायम, पेर्णेम और बिचोलीम सीटों पर एमजीपी मजबूत है. मांद्रेम इस सूची में नहीं था. उन्होंने कहा कि गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन कौन-सी सीटें मांगनी हैं यह तय नहीं हुआ.
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि एमजीपी को "अपनी सीमाएं समझनी चाहिए". उन्होंने एक स्थानीय टीवी चैनल से कहा, "2022 में एमजीपी हमारे साथ नहीं थी, टीएमसी के साथ गई थी. उसे फायदा नहीं हुआ और वह सिर्फ दो सीटें जीत सकी."
महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी ने 1963 में गोवा के पहले मुख्यमंत्री दिए थे. बाद के दौर में पार्टी का प्रभाव घटा, फिर भी वह हर सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा रही. 2012 के बाद पहली बार भाजपा-एमजीपी के चुनावपूर्व गठबंधन की चर्चा है.
ढवलीकर ने जवाब दिया कि उनकी पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम तीन हजार वोट पाती है. भाजप प्रदेश अध्यक्ष दामोदर नाइक ने कहा कि दोनों सहयोगियों के रिश्ते ठीक हैं. "सही फैसला सही समय पर लिया जाएगा. अभी सब अटकलें हैं."