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बातचीत शुरू हुई या नहीं, इस पर भी सहयोगियों में मतभेद

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोवा में भाजप-एमजीपी गठबंधन की बातचीत को लेकर दो अलग-अलग बयान सामने आए हैं। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि बातचीत शुरू हो गई है, जबकि मंत्री सुदिन धावलीकर ने कहा कि अभी बातचीत शुरू नहीं हुई।

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पणजी : गोवा के दो सत्तारूढ़ सहयोगी दल इस बुनियादी बात पर भी एक नहीं हैं कि गठबंधन की बातचीत शुरू हुई है या नहीं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजप-एमजीपी गठबंधन की शुरुआती चर्चा होने की बात मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कही, जबकि वरिष्ठ एमजीपी नेता और बिजली मंत्री रामकृष्ण 'सुदिन' धावलीकर ने कहा कि कोई बातचीत नहीं हुई है।

"हम भाजप-एमजीपी गठबंधन बनाएंगे। हमने एमजीपी अध्यक्ष पांडुरंग 'दीपक' धावलीकर के साथ बैठक कर चर्चा शुरू की है," सावंत ने कहा। उन्होंने कहा कि अंतिम चर्चा भाजप के केंद्रीय नेताओं के साथ होगी और "हमने गठबंधन के साथ 2027 का चुनाव जीतने का फैसला किया है।"

लेकिन सुदिन धावलीकर ने कहा कि फैसला पार्टी की कार्यकारिणी और वार्षिक आम सभा के बाद ही होगा। "उसके बाद हम गठबंधन की बातचीत शुरू करेंगे और मैं दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह, भाजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलूंगा," उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि एमजीपी 13 विधानसभा क्षेत्रों में काम कर रहा है।

गठबंधन का इतिहास पुराना है। 1963 में एमजीपी ने गोवा को पहला मुख्यमंत्री दिया, 1990 के दशक में वह बड़े सहयोगी के तौर पर भाजप के साथ आया, और 2022 के बाद से सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है — तब उसने टीएमसी के साथ चुनाव लड़कर धावलीकर की सीट समेत दो सीटें जीती थीं।

सावंत ने कहा कि एमजीपी को अपनी "सीमाएं समझनी चाहिए," जबकि धावलीकर ने दावा किया कि पार्टी के पास "हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 3,000 वोट" हैं। भाजप प्रदेश अध्यक्ष दामोदर नाईक ने कहा कि रिश्ते ठीक हैं। मंड्रेम में पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर और उनके पुराने प्रतिद्वंद्वी दयानंद सोपटे ने जीत अरोलकर के खिलाफ एकजुट होकर पुरानी दुश्मनी भुला दी है।

एमजीपी ने पहले भी ऐसे गठबंधन समीकरण बदले हैं। 1994 में भाजप को एमजीपी के वोटबैंक से ही पहली बार चार सीटें मिलीं, जबकि 1999 में दोनों दल अलग लड़े और भाजप मजबूत हुआ। 2022 के बाद एमजीपी सत्ता में आया। अब सुदिन धावलीकर ने पोंडा में प्रचार शुरू किया है — भाजप विधायक रवि नायक के निधन के बाद यह सीट करीब एक साल से खाली है। 2027 का चुनाव नजदीक है, पर सीट बंटवारे का फैसला दोनों दल टाल रहे हैं।