मेलबर्न: ग्लेन मैक्सवेल ने मंगलवार को अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत कर दिया। 14 साल का यह सफर तीन विश्व कप पदक, 10 शतक और मुंबई में खेली गई उस एक पारी के साथ पूरा हुआ, जिसे देखने वाला कोई नहीं भूला।
38 साल के मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 7 टेस्ट, 149 एकदिवसीय और 130 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, 10 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए और 136 विकेट लिए। वे 2025 में ही वनडे से संन्यास ले चुके थे। इस घोषणा से उनका टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर तथा प्रथम श्रेणी और लिस्ट ए क्रिकेट भी खत्म होता है।
सम्मान की सूची छोटी और भारी है: 2015 और 2023 के एकदिवसीय विश्व कप और 2021 का टी20 विश्व कप। 2023 के अहमदाबाद फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का पीछा मुश्किल में था, तब उनकी पारी ने उसे संभाला। लेकिन उन्हें परिभाषित करने वाली पारी उसी टूर्नामेंट में पहले आई थी — मुंबई में अफगानिस्तान के खिलाफ नाबाद दोहरा शतक, जो इतनी तकलीफ के बीच बना कि दौड़ना भी मुश्किल था और जिसने वह मैच बचाया जिसे ऑस्ट्रेलिया को जीतना नहीं था।
वही एक पारी में मैक्सवेल थे: एक घंटे तक तकनीकी रूप से बिखरे दिखने वाला बल्लेबाज, जो बीस मिनट में मैच छीन सकता था, और इतना अच्छा पार्ट-टाइम ऑफ स्पिनर कि हर चरण में इस्तेमाल हो सके।
वे टी20 फ्रैंचाइजी क्रिकेट खेलते रहेंगे, जिसमें बिग बैश लीग में मेलबर्न स्टार्स भी शामिल है। इससे वे ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों के सामने उसी फॉर्मेट में बने रहेंगे, जो उनके खेल के लिए ही बना है।
ऑस्ट्रेलिया के लिए सवाल अब सफेद गेंद के मध्यक्रम का और उपमहाद्वीप में टेस्ट टीम के ऑलराउंडर की जगह का है, जहां उनकी ऑफ स्पिन एक बार चयनकर्ताओं को बल्लेबाजी कमजोर किए बिना दूसरा स्पिनर देती थी।
उनका संन्यास ऐसे हफ्ते में आया है, जब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट अपनी सफेद गेंद की योजनाएं फिर से बना रहा है; इससे वह खिलाड़ी हट गया, जो फिटनेस के कारण — फॉर्म के कारण नहीं — टीम से बाहर-अंदर होता रहा था। 2027 का एकदिवसीय विश्व कप, जिसका ऑस्ट्रेलिया बचाव करेगा, उनके बिना खेला जाएगा।
मैक्सवेल के आंकड़े दो तरह से पढ़े जाएंगे: टेस्ट रिकॉर्ड साधारण, सफेद गेंद का रिकॉर्ड असाधारण। 149 वनडे और 130 टी20 ही वह जगह हैं, जहां उनका करियर असल में जिया गया।