रत्नागिरी जिले के प्राकृतिक सौंदर्य से भरे गुहागर तालुका को फिल्म और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी राज्य सरकार ने शुरू की है। सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशीष शेलार ने गुहागर के पालशेत में महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) की संयुक्त भागीदारी से ‘फिल्म टूरिज्म’ परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव एक महीने के भीतर देने के सीधे निर्देश दिए हैं।
इस परियोजना की आर्थिक योजना के लिए ‘फिल्म टूरिज्म नीति’ के जरिए और जरूरत पड़ने पर ‘म्हाडा’ (MHADA) की मदद लेने के विकल्पों पर भी विचार करने के निर्देश उन्होंने दिए।
मंत्रालय में मंत्री शेलार की अध्यक्षता में इस विषय पर एक विशेष बैठक हुई। बैठक में गुहागर और आसपास के तटीय इलाकों की सरकारी जमीन के फिल्म निर्माण और पर्यटन के लिए बेहतर इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा हुई।
125 एकड़ जमीन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बुनियादी ढांचा गुहागर तालुके के पालशेत गांव में पर्यटन विभाग की करीब 125 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध है। इस जमीन का पूरा उपयोग करके वहां फिल्म निर्माण और पर्यटन के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा बनाने की अवधारणा पूर्व विधायक डॉ. विनय नातू ने सरकार के सामने रखी थी। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कोंकण में ऐसी ‘मिनी फिल्म सिटी’ या फिल्म हब बनने पर स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकते हैं।
शूटिंग के लिए ‘एक खिड़की’ और सारी सुविधाएं एक जगह की जरूरत गुहागर, दापोली और आसपास के खूबसूरत समुद्र तट, नारियल-सुपारी के बाग और ऐतिहासिक इमारतें मराठी और हिंदी फिल्मों, धारावाहिकों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए हमेशा पसंद की जाती रही हैं। लेकिन फिलहाल अलग-अलग सरकारी इजाजत लेने, तकनीशियनों के रहने की व्यवस्था, तकनीकी साधनों और स्टूडियो सुविधाओं की कमी से निर्माताओं को कई दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसी पृष्ठभूमि में:
पालशेत, वेलनेश्वर और तवसाल की सरकारी जमीनों का विकास करना।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के आधार पर आधुनिक शूटिंग परिसर बनाना।
शूटिंग से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना।
महीने भर में योजना देने के आदेश इन सभी बातों पर विचार करके मंत्री शेलार ने एमटीडीसी के सहयोग से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए। धन जुटाने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं में तालमेल बिठाकर प्रशासन को एक महीने में परियोजना की विस्तृत विकास योजना (DPR) देने के आदेश भी उन्होंने दिए।
इस बैठक में पूर्व विधायक डॉ. विनय नातू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी, दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी की प्रबंध निदेशक स्वाती म्हसे-पाटिल, म्हाडा के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जयस्वाल, एमटीडीसी के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से मौजूद थे।

