चेन्नई: दो सत्रों में इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक की बाजार पूंजी लगभग एक तिहाई गई। वजह इस्तीफे के पत्र का एक वाक्य है।
शुक्रवार को शेयर करीब 15-16 फीसदी गिरकर 47.91 रुपये पर आ गया; गुरुवार को वह 20 फीसदी फिसला था। एमडी और सीईओ पी.एन. वासुदेवन के तत्काल इस्तीफे की सूचना गुरुवार को कारोबार बंद होने के करीब एक्सचेंज को दी गई थी। उत्तराधिकारी कार्यभार संभाले तक वे पद पर रहेंगे।
शुक्रवार को एक बिजनेस चैनल से बात करते हुए वासुदेवन ने कहा कि फैसला अचानक नहीं है। 'यह मसला दो-तीन साल से चल रहा है, रातोरात का नहीं,' उन्होंने कहा। 'कई कारणों पर विचार करने के बाद मैंने यह फैसला लिया।'
उन्होंने जिस मसले का जिक्र किया, वह हितों का टकराव है — या उसकी धारणा। यह उस एनबीएफसी से जुड़ा है जिसे उनकी बेटी ने सह-प्रवर्तित किया है और जिसे भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिला है। 'हितों का टकराव नहीं है, सिर्फ धारणा है,' उन्होंने कहा। 'इस धारणा को हटाने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते।'
उन्होंने साफ किया कि इस बार इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। 2022 में उन्होंने पद छोड़ने का मन बनाया था, फिर रुक गए थे। बोर्ड ने नामांकन और पारिश्रमिक समिति को अंदर और बाहर से उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। अगले चार से छह महीनों में नेतृत्व हस्तांतरण होना चाहिए, ऐसा वासुदेवन ने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि शुरू से ही बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाते रहे हैं और अब ज्यादा हिस्सा नहीं है।
बाजार की प्रतिक्रिया किसी व्यक्ति को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर है कि सीईओ का जाना किसी ऋणदाता को कितना महंगा पड़ता है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों का मूल्यांकन उनकी लोन बुक के अनुमान और फंड की लागत से होता है; दोनों प्रबंधन की निरंतरता से पढ़े जाते हैं। दो दिन में 30 फीसदी की गिरावट का मतलब है कि बाजार ने उसी निरंतरता को फिर से कीमत दी है।
बैंक ने हस्तांतरण की तारीख नहीं बताई है। समिति के नाम तय होने तक निवेशकों का सवाल 'अगले साल इक्विटास कौन चलाएगा' नहीं, बल्कि 'अगली तिमाही में आंकड़ों पर हस्ताक्षर कौन करेगा' होगा।