मुंबई: सत्ता परिवर्तन की बात करने वालों को एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को गोरेगांव में जवाब दिया। "हम सिर्फ भाषण नहीं देते, किसानों को राशन देते हैं," उपमुख्यमंत्री ने शिवसेना की दशहरा रैली में कहा।
शिंदे ने रैली सूखे से जूझ रहे किसानों को समर्पित की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने 100 ट्रक अनाज भेजा है और 5,000 रुपये की मदद सिर्फ शुरुआती राहत है, अंतिम मुआवजा नहीं। "राज्य की तिजोरी पर पहला हक किसानों का है," उन्होंने कहा। उनका दावा था कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सूखे की समीक्षा की है और मदद का भरोसा दिया है।
पार्टी ने गरीब परिवारों की बेटियों को 25,000 साइकिलें और महिलाओं को 25,000 सिलाई मशीनें बांटनी शुरू कर दी हैं और किसानों की बेटियों के सामूहिक विवाह कराए जाएंगे।
राजनीतिक हमला उन्होंने सीधा किया। किसी का नाम लिए बिना शिंदे ने आरोप लगाया कि विपक्ष विदेशी ताकतों के सहारे देश में अराजकता फैला रहा है। "वे हिंदुस्तान में रहते हैं और पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण और भारत विरोधी काम है," उन्होंने कहा। उन्होंने 'इंडिया' गठबंधन को "दस मुखी रावण" बताया और सत्ता परिवर्तन की मांग खारिज की। "यह हिंदुस्तान है, बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका नहीं। चुनी हुई सरकार को भाषणबाजी से गिराया नहीं जा सकता।"
वोट चोरी के आरोप पर शिंदे ने 2019 की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि तब अविभाजित शिवसेना ने भाजपा के साथ चुनाव लड़ा और फिर कांग्रेस-राकांपा के साथ सरकार बनाई। "वही असली वोट चोरी थी, जनादेश की डकैती थी।" ठाकरे पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर सत्ता बदली, तब भी उन्हें पता नहीं चला।
शिंदे ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च की आलोचना की और कहा कि यह संस्था का अपमान है। उन्होंने मतदाता सूची की विशेष फेरबदल का बचाव किया। "जीतते हैं तो EVM अच्छा, हारते हैं तो EVM खराब," उन्होंने कहा।
अपनी पार्टी की ताकत गिनाते हुए उन्होंने बताया—15 सांसद, 74 विधायक, 1,100 पार्षद और 63 नगर निकाय अध्यक्ष। रैली में हाई कोर्ट के पूर्व जज श्रीहरि दावरे शिवसेना में शामिल हुए। और विपक्ष के लिए चेतावनी—"अगर राष्ट्रवादी सड़कों पर उतर आए, तो उन्हें जान बचाकर भागना पड़ेगा।"