नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने खुद को वक्त दिया है, और मतदाताओं को भी।
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में दावे और आपत्ति दर्ज करने की समयसीमा बढ़ाने पर विचार करने को कहा था। उसके अगले ही दिन आयोग ने छह राज्यों में यह अवधि बढ़ाई और पांच राज्यों में प्रक्रिया दोबारा शुरू की।
संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक महाराष्ट्र में 13 नवंबर, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 20 नवंबर, नागालैंड में 25 नवंबर और तेलंगाना में 26 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। दिल्ली में अब आखिरी तारीख 25 नवंबर है।
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखें भी आगे बढ़ गई हैं। पांच राज्यों में यह अब 30 नवंबर है। दिल्ली में 22 दिसंबर।
पिछले एक महीने में SIR सबसे तीखा टकराव बिंदु रहा है। विपक्ष ने आयोग पर बड़े पैमाने पर असली मतदाताओं के नाम काटने का आरोप लगाया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। आयोग का कहना है कि यह अभियान मृत और दोहरे नामों की सफाई है।
दिल्ली में इस बहस ने आंकड़ों का रूप ले लिया है। मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बूथ स्तरीय एजेंटों ने "आपत्तिकर्ता" बनकर नाम हटाने की मांग वाले करीब 68 प्रतिशत फॉर्म 7 दाखिल किए, और वे सब मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ थे, जिनमें "अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित" अथवा "मृत्यु" की वजह लिखी गई। इस क्षेत्र में 31 अगस्त से 843 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। तीसरे पक्ष द्वारा दाखिल 597 फॉर्म में से 96 प्रतिशत में भाजपा के बूथ एजेंट आपत्तिकर्ता के रूप में नामित हैं, और इनमें से 572 फॉर्म क्षेत्र के 24 भागों के मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ हैं।
इस बढ़ोतरी से विपक्ष के अभियान का कैलेंडर भी बदल गया है। INDIA गठबंधन ने शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ "जन-महाभियोग" और एक नवंबर को रामलीला मैदान में रैली का ऐलान किया है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी कई याचिकाओं के साथ आया। आयोग ने यह नहीं बताया है कि पांच राज्यों में दोबारा खुली अवधि भी इन्हीं तारीखों तक चलेगी या नहीं।
महाराष्ट्र के एक मतदाता के लिए इसका मतलब है कि नाम सूची में है या नहीं, यह जांचने और दावा दाखिल करने के लिए एक महीना और मिल गया है। आयोग के लिए समय कम हुआ है: दिल्ली की अंतिम सूची अब साल खत्म होने से तीन हफ्ते पहले आएगी, और पुनरीक्षण पर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा।