बेंगलुरु : पूल में उतरने से डरने वाली लड़की अब भारतीय तैराकी का इतिहास बदल चुकी है।
16 साल की धिनिधी देसिंघु ने सोमवार को सेनेगल के डकार में चल रहे यूथ ओलंपिक में महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीता। उनका समय 56.27 सेकंड रहा। इसी साल 18 जून को अहमदाबाद में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने 56.57 सेकंड का जो अपना रिकॉर्ड बनाया था, वह टूट गया।
क्रोएशिया की अना बोबानोविच ने 55.89 सेकंड में स्वर्ण और न्यूजीलैंड की अलिसा लॉसन ने 56.13 सेकंड में रजत जीता। धिनिधी बोबानोविच से 0.38 और लॉसन से 0.14 सेकंड पीछे रहीं।
यह भारतीय तैराकी के लिए पहली बार है। यूथ ओलंपिक में यह भारत का पहला तैराकी पदक है, और युवा तथा मुख्य दोनों संस्करणों को मिलाकर ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली वे पहली भारतीय तैराक बनीं। डकार में इस पदक से भारत का खाता भी खुला।
स्पर्धा से पहले हीट में उन्होंने 56.80 सेकंड का समय दिया और तीसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई। वे यूथ ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला तैराक रहीं।
फाइनल में पहले 50 मीटर के बाद वे 27.31 सेकंड में पांचवें स्थान पर थीं। दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार बढ़ाई और तीसरे स्थान पर पहुंच गईं।
"मैं पदक के बारे में नहीं सोच रही थी। मेरा जोर समय सुधारने पर था," उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि डकार पहुंचने के बाद तीन दिन पूल बंद रहने से अभ्यास नहीं हो सका। "मौसम भी उमस भरा था, लेकिन अब मैं सेट हो गई हूं और आगे की स्पर्धाओं में अच्छा करूंगी।"
दक्षिण अफ्रीका के महान तैराक चाड ले क्लॉस ने गैलरी में मिलकर कहा कि वे उनके पदक के लिए दुआ कर रहे थे, और एक पिन दी, ऐसा भी उन्होंने बताया।
14 साल की उम्र में पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत की सबसे युवा खिलाड़ी रहीं धिनिधी वहां महिलाओं की 200 मीटर फ्रीस्टाइल में 23वें स्थान पर रही थीं। 2023 में 76वीं सीनियर राष्ट्रीय जलक्रीड़ा चैंपियनशिप में उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल जीता था।
इसी स्पर्धा में जूडो खिलाड़ी खुशबू राजकभाई ने महिलाओं के 63 किलो वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर कम से कम रजत पदक पक्का किया। यूथ ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली वे दूसरी भारतीय जूडो खिलाड़ी हैं।