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नोटबंदी के 10 साल; नकदी दोगुनी, 500 के नकली नोट 20.5% बढ़े

8 नवंबर 2016 को 500 और 1,000 के नोट रद्द हुए थे. दस साल बाद सर्कुलेशन में नकदी 17.77 लाख करोड़ से 43.16 लाख करोड़ हो गई. RBI की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में 2,29,746 नकली नोट पकड़े गए.

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मुंबई: 8 नवंबर 2016. रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए और 500 तथा 1,000 रुपये के नोट रद्द हो गए. दस साल बीत गए, और इस फैसले को नापने वाले दो आंकड़े उलटी दिशाओं में खड़े हैं.

रद्द हुए नोट 15.42 लाख करोड़ रुपये के थे, यानी सर्कुलेशन की कुल कीमत का 86.9 फीसदी. बदली की खिड़की बंद होने तक 15.3 लाख करोड़ रुपये — 99.3 फीसदी — बैंकिंग सिस्टम में लौट आए, RBI के आंकड़े बताते हैं.

तब सर्कुलेशन में नकदी 17.77 लाख करोड़ थी. इस साल 23 अक्टूबर को यह 43.16 लाख करोड़ हो गई — करीब 143 फीसदी की बढ़ोतरी, वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक. RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 के अंत में नकदी 41.68 लाख करोड़ थी, एक साल में 11.9 फीसदी ज्यादा.

नकदी और जीडीपी का अनुपात भी यही कहता है. 2015-16 में यह 12.1 फीसदी था, 2016-17 में 8.7 फीसदी पर फिसला, 2020-21 के महामारी वर्ष में 14.4 फीसदी पर गया और 2025-26 में फिर 12 फीसदी के आसपास — यानी जहां से शुरुआत हुई थी वहीं.

नकली नोटों पर RBI की ताजा रिपोर्ट कहती है कि 2025-26 में बैंकिंग सिस्टम में 2,29,746 नकली नोट पकड़े गए, पिछले साल 2,17,396. इनमें 500 रुपये के 1,41,907 नोट थे, 20.5 फीसदी ज्यादा. नकली 20 रुपये के नोट 47.4 फीसदी बढ़े.

एक बदलाव साफ है — डिजिटल. UPI के लेनदेन हर साल बढ़ रहे हैं और जीडीपी के प्रतिशत के रूप में भी बढ़ रहे हैं, RBI के आंकड़े यही दिखाते हैं.

नवंबर 2016 के दो मकसदों की जांच आसान है. कहा गया था कि नकदी में रखा काला धन बाहर आएगा. ऐसा नहीं हुआ — रद्द नोटों में से 99.3 फीसदी लौट आए और दशक के बड़े हिस्से में नकदी अर्थव्यवस्था से तेज बढ़ी.

RBI के आंकड़े नोटबंदी से क्या हासिल हुआ, यह बहस खत्म नहीं करते. मगर यह जरूर दिखाते हैं कि क्या नहीं बदला — नकद रखने की भारतीय आदत.