नई दिल्ली: दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में सूची से हटाए गए लोगों से नए मतदाता के तौर पर आवेदन करवाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को खरी खोटी सुनाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने सुनवाई की।
कोर्ट का मुख्य सवाल यह था कि फॉर्म 6 पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए है। जो लोग 2026 की सूची में थे और सिर्फ पता बदलने या कुछ समय बाहर रहने की वजह से गणना फॉर्म नहीं भर पाए, उनसे यह फॉर्म भरवाना उनसे यह झूठी घोषणा करवाने जैसा है कि उन्होंने पहले कभी पंजीकरण नहीं कराया, ऐसा न्यायमूर्ति बागची ने कहा।
"फॉर्म 6, 7 और 8 पत्थर पर खुदे हैं। इनमें आप बदलाव नहीं कर सकते," उन्होंने कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि आयोग इसके बजाय मतदाता से घोषणा ले कि गणना फॉर्म क्यों नहीं भरा गया। "मतदान का हक अहम हक है। मान लीजिए कोई मतदाता लापरवाह था, उसने जवाब नहीं दिया, तो क्या उसका हक हमेशा के लिए छिन जाएगा?" उन्होंने पूछा।
आंकड़े इस तरह हैं: एसआईआर शुरू होने से पहले दिल्ली में 1,45,10,299 मतदाता थे। इनमें से 97,53,577 ने गणना फॉर्म भरा, जबकि 47,56,722 ने नहीं भरा। इनमें 31,59,213 को "स्थायी रूप से स्थानांतरित" बताया गया और 19,34,243 को "तार्किक विसंगति" की नई श्रेणी में डालकर नोटिस भेजे गए। 31 अगस्त को जारी मसौदा सूची से ये नाम हटाए गए थे।
याचिकाकर्ता अंजली भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि हटाए गए 47 लाख में से 43 लाख लोगों को सिर्फ पता बदलने पर हटाया गया और उन्हें फॉर्म 8 भरने की इजाजत नहीं दी जा रही। आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डी. एस. नायडू मौजूद थे।
कोर्ट ने साफ किया कि बिहार मामले का फैसला इस मुद्दे पर बाध्यकारी उदाहरण नहीं है। "बिहार में आयोग ने 'तार्किक विसंगति' श्रेणी नहीं अपनाई थी। पश्चिम बंगाल में हमने इसे अंतरिम तौर पर इजाजत दी थी। इसकी वैधता पर हमने अंतिम फैसला नहीं दिया है," बेंच ने कहा।
मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि दिल्ली में रहने वाले प्रवासी मजदूरों, फेरीवालों और दिहाड़ी कामगारों तक आयोग खुद पहुंचे। "उन पर बोझ डालने के बजाय आप उनके पास क्यों नहीं जाते?" उन्होंने पूछा। तारीख बढ़ाने का आदेश दिए बिना बेंच ने कहा कि आयोग खुद फैसला ले और मामला दो हफ्ते बाद रखा। 30 अक्टूबर फिलहाल दावे और आपत्ति की आखिरी तारीख है; अंतिम सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित होनी है।