नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस में बगावत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। सहायक पुलिस आयुक्त मानस्वी वशिष्ठ को सोमवार देर रात निलंबित कर दिया गया।
जांच में पाया गया कि उन्होंने वरिष्ठों को गलत जानकारी दी, अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रदर्शन के लिए उकसाया और सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पोस्ट साझा की। यह बात निलंबन के आदेश में कही गई है।
30 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में तनाव बना था। उत्तर जिले के सैकड़ों कर्मचारियों ने पुलिस आयुक्त के खिलाफ करीब ढाई घंटे नारेबाजी की। हालात काबू में लाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल बुलाया गया था।
इन कर्मचारियों ने पांच मांगें रखी हैं। एफआरआरओ सर्कुलर वापस लेना, वेतन संबंधी विसंगतियां दूर करना, पुरस्कारों में भेदभाव रोकना, भ्रष्टाचार के आरोपों की समयबद्ध जांच और 'कानून का राज' बहाल करना।
मामले की जांच लोक नायक भवन में चल रही है और विशेष पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) गजेंद्र सिंह बिष्ट तथा दो अन्य अधिकारियों — सत्यवीर सिंह (सहायक पुलिस आयुक्त, ऑपरेशन) और श्वेता कौशिक (तुगलक रोड थाना प्रभारी) — की भूमिका जांची जा रही है।
पुलिस ने करीब 100 कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। महिला कर्मचारियों की शिकायत के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी उन्हें घूरता रहता था और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता था।
महिला सुरक्षा विंग की करीब 30 महिलाएं इस याचिका में शामिल हैं और उन्होंने बयान दिए हैं।
पुलिस आयुक्त के दायरे में यह घटना दुर्लभ है। दिल्ली पुलिस बल में इस तरह का खुला प्रदर्शन कई दशकों में नहीं हुआ था।
निलंबन के बावजूद मांगें नहीं मानी गई हैं। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने अगली रणनीति पर अभी साफ रुख नहीं जताया है।
मामले की पृष्ठभूमि उलझी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक जांच में प्रदर्शन को 2020 के दिल्ली दंगों से जोड़ने का जिक्र है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।