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दिवाली की सुबह AQI 384; 23 में से 11 स्टेशन पहले ही 400 के पार, दस साल में सबसे खराब

रविवार सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत AQI 384 था, लेकिन 23 में से 11 स्टेशन 400 के ऊपर थे. पंजाबी बाग में 450. दस साल की सबसे खराब दिवाली-पूर्व हवा.

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नई दिल्ली: दिवाली की सुबह दिल्ली को वही हवा मिली, जिसकी शिकायत वह हफ्ते भर कर रही थी.

रविवार सुबह 6 बजे शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 384 था, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक. 'गंभीर' की सीमा 400 है, इसलिए औसत उससे नीचे रहा. मगर औसत नक्शा छिपा देता है — तब रिपोर्ट करने वाले 23 में से 11 स्टेशन 400 के पार थे. पंजाबी बाग 450, आरके पुरम 449, आईआईटी दिल्ली 446, द्वारका 444, सीआरआरआई मथुरा रोड 425 और सिरी फोर्ट 423 पर थे. बाकी 12 स्टेशन 301 से 400 के बीच रहे. सुबह 7.29 बजे इंडिया गेट के आसपास 398 दर्ज हुआ.

इसे दस साल की सबसे खराब दिवाली-पूर्व हवा बताया जा रहा है. यह पटाखों के बाद नहीं, उनसे पहले ही आ गई — यही अधिकारियों और डॉक्टरों की चिंता है.

तीन चीजें एक साथ जुटी हैं: प्रदूषण न फैलने देने वाला मौसम, दिवाली के पटाखे और गाड़ियों का धुआं, और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का चरम. शनिवार को परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.4 फीसदी थी, पराली की 1.7 फीसदी — रविवार को यह 5.4 फीसदी तक जाने का अनुमान है. शुक्रवार को सैटेलाइट आंकड़ों ने छह राज्यों में 589 घटनाएं दर्ज कीं: पंजाब 357, मध्य प्रदेश 139, राजस्थान 58, उत्तर प्रदेश 23, हरियाणा 9 और उत्तराखंड 3.

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शुक्रवार, 6 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का तीसरा चरण लागू किया. धूल उड़ाने वाला ज्यादातर निर्माण और तोड़फोड़ का काम बंद, स्टोन क्रशर और खनन पर रोक, दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में बीएस-थ्री पेट्रोल व बीएस-फोर डीजल चारपहिया वाहनों पर निर्बंध. पांचवीं तक की कक्षाओं को हाइब्रिड विकल्प, और सरकारी-निजी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम की छूट.

सेहत पर असर दिखने लगा है. एम्स के पूर्व निदेशक और फेफड़ों के विशेषज्ञ डॉ. रणदीप गुलेरिया बताते हैं कि सांस की तकलीफ लेकर आने वाले मरीजों में करीब 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. "अस्थमा, सीओपीडी और दिल की बीमारी वाले मरीजों की हालत बिगड़ रही है," वे कहते हैं. "और अब ऐसे लोग भी आ रहे हैं जिन्हें पहले कोई सांस की परेशानी नहीं थी — गले में जलन, सांस फूलना, घरघराहट, लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी."

दिल्ली के अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है, इमरजेंसी में अतिरिक्त बेड आरक्षित हैं.

आज सिर्फ प्रमाणित ग्रीन पटाखों की इजाजत है, दो समय — सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10. सोमवार, 9 नवंबर से राजधानी में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लौट आएगा. औसत 401 का 'गंभीर' स्तर पार हुआ या नहीं, यह सोमवार को अगले शहरव्यापी आंकड़े के बाद ही पता चलेगा.