नई दिल्ली: घोषणा बुधवार को हुई थी। कागजी आदेश गुरुवार शाम आया।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 29 अक्टूबर को अपना कार्यालय ज्ञापन जारी कर केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मूल वेतन के 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 63 प्रतिशत कर दिया, जो एक जुलाई 2026 से लागू होगा। पेंशनभोगियों की महंगाई राहत में भी उतने ही तीन प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।
आदेश के पीछे के आंकड़े: करीब 48.54 लाख कार्यरत कर्मचारी और 68.71 लाख पेंशनभोगी, और सालाना 10,016.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च। कैबिनेट का फैसला बताते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे "दिवाली का तोहफा" कहा था।
चूंकि संशोधन जुलाई से पूर्वप्रभावी है, चार महीनों का एरियर बनता है — जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर। भुगतान से जुड़ी खबरों के मुताबिक यह अंतर अक्टूबर के वेतन या पेंशन के साथ मिलने की उम्मीद है, हालांकि आदेश में जमा होने की तारीख तय नहीं की गई है। रकम मूल वेतन पर निर्भर है, इसलिए ज्यादा मूल वेतन का मतलब ज्यादा रुपये।
उसी दिन पुरानी वेतन संरचना पर बने कर्मचारियों के लिए दो छोटे आदेश भी गए। छठे केंद्रीय वेतन आयोग के तहत वेतन पाने वालों का महंगाई भत्ता मूल वेतन के 262 प्रतिशत से 269 प्रतिशत कर दिया गया, यानी सात प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी। पांचवें वेतन आयोग वालों का 483 प्रतिशत से 497 प्रतिशत, यानी 14 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी।
पिछला संशोधन इस साल 18 अप्रैल को घोषित हुआ था और एक जनवरी से लागू हुआ था, जिसमें महंगाई भत्ता और राहत 58 से 60 प्रतिशत हुए थे और सालाना 6,791.24 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था।
50 हजार रुपये मूल वेतन वाले केंद्रीय कर्मचारी के लिए तीन प्रतिशत अंक का मतलब एरियर से पहले महीने में 1,500 रुपये ज्यादा। पेंशनभोगी के लिए यही गणित मूल पेंशन पर लागू होता है।
महंगाई भत्ता सिर्फ मूल वेतन पर बनता है। यह पूरी टेक-होम सैलरी पर लागू नहीं होता, और 63 प्रतिशत का मतलब वेतन में 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी नहीं है — यह फर्क हर किस्त की घोषणा के बाद फॉरवर्ड होने वाले मैसेज में अक्सर छूट जाता है।
सशस्त्र बलों के जवानों और रेल कर्मचारियों के लिए अलग आदेश रक्षा मंत्रालय और रेल मंत्रालय जारी करेंगे।