चेक कंपनियों को भारतीय बाजार में सिर्फ उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें महाराष्ट्र में उत्पादन संयंत्र लगाने चाहिए, यहां निवेश करना चाहिए और तकनीक के आदान-प्रदान से लंबी साझेदारी बनानी चाहिए। प्रोटोकॉल मंत्री जयकुमार रावल ने यह अपील की।
वह भारत और चेक गणराज्य के उद्योग प्रतिनिधियों की उस बैठक में बोल रहे थे, जिसका आयोजन CII ने ताज प्रेसिडेंट होटल में किया था। इस मौके पर चेक उपप्रधानमंत्री और व्यापार मंत्री कारेल हॅव्हलिसेक मौजूद थे।
रावल ने कहा कि अगर चेक गणराज्य की इंजीनियरिंग, वाहन निर्माण, अंतरिक्ष उद्योग, आधुनिक मशीनरी, रोबोटिक्स और वैज्ञानिक शोध की ताकत को महाराष्ट्र के कुशल कामगारों और उपलब्ध बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाए, तो दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में महाराष्ट्र का हिस्सा लगभग 40% है। 2024-25 में भारत में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का लगभग 39% हिस्सा राज्य में आया।
मुंबई देश का आर्थिक और व्यावसायिक केंद्र है। पुणे वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग और तकनीक का प्रमुख केंद्र है, जबकि नाशिक उत्पादन, अंतरिक्ष उद्योग और कृषि के अवसरों के लिए अहम जगह है। छत्रपति संभाजीनगर और राज्य के अन्य औद्योगिक केंद्रों में भी विनिर्माण का दायरा बढ़ रहा है। रावल ने चेक कंपनियों से इस औद्योगिक क्षमता का फायदा उठाने की अपील की।
आधुनिक तकनीक, वाहन निर्माण और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के अवसर
वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग, औद्योगिक ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन, अंतरिक्ष से जुड़े उत्पादन और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में दोनों देशों के बीच सहयोग के बड़े अवसर हैं। राज्य शोध, नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रहा है। रावल ने चेक कंपनियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा और लेजर तकनीक जैसे क्षेत्रों में महाराष्ट्र के साथ काम करने की अपील की।
रावल ने कहा कि पर्यावरण-अनुकूल तकनीक, पुनर्चक्रण, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, खेती और खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग तकनीक, आधुनिक निर्माण, वास्तुकला और स्मार्ट बिल्डिंग समाधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की काफी संभावना है। ऐसी साझेदारियों से उत्पादकता बढ़ सकती है, मूल्यवर्धन हो सकता है और किसानों व उद्योगों के लिए नए अवसर बन सकते हैं। चेक उद्योगों से महाराष्ट्र में निवेश करने और स्थानीय उत्पादन व तकनीकी विकास में योगदान देने की अपील करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से भविष्य में आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
हम भारत के औद्योगिक और तकनीकी अवसरों का लाभ उठाएंगे: कारेल हॅव्हलिसेक
हॅव्हलिसेक ने भारत के विकास और पिछले कुछ दशकों में उसकी प्रगति की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य का एक प्रतिनिधिमंडल भारत की राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी ताकत को समझने के लिए दौरे पर है। यह प्रतिनिधिमंडल दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे प्रमुख केंद्रों पर जाकर अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाश रहा है।
उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य औद्योगिक और तकनीकी क्षमता वाला देश है। वहां के विश्वविद्यालय, शोध और विकास तंत्र और मूल्यवर्धित उत्पादन पर टिकी अर्थव्यवस्था उसकी प्रमुख ताकत हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में, दो अरब से अधिक लोगों के बाजार से जुड़कर व्यापार और आर्थिक सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य भारत के साथ औद्योगिक रिश्ते मजबूत करने को उत्सुक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बैठक से व्यापार, निवेश, तकनीक हस्तांतरण और औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
भारत-चेक आर्थिक साझेदारी संयुक्त उत्पादन, सह-विकास, तकनीकी साझेदारी और नवाचार पर आधारित नए चरण में प्रवेश कर रही है। महाराष्ट्र सहित पश्चिम भारत का विविधतापूर्ण औद्योगिक तंत्र चेक उद्योगों के लिए उपयोगी है। चेक गणराज्य भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और नवाचार क्लस्टरों से जोड़ने वाली अहम कड़ी बन सकता है, CII के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष वीर अडवाणी ने यह बात कही।
इस मौके पर विभिन्न उद्योग समूहों ने आपसी समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

