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परिसीमन: कांग्रेस के तीन सवाल, सरकार ने दिखाए अपने पत्र

परिसीमन पर नया प्रस्ताव है या नहीं और सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई जाती, कांग्रेस ने केंद्र सरकार से यह पूछा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले की सलाह-मशविरे का हवाला देते हुए विपक्ष से संपर्क का दावा किया।

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नई दिल्ली : परिसीमन पर नया प्रस्ताव है या नहीं, और सर्वदलीय बैठक बुलाने से सरकार "हठपूर्वक" क्यों इनकार कर रही है, कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार से यह पूछा है। इस साल की शुरुआत में लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के पराजित होने के बाद यह नया टकराव शुरू हुआ है।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट में कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने पूछा कि 17 अप्रैल को पराजित विधेयक को केंद्र सरकार फिर लाएगी या नहीं। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अगले दिन जवाब दिया।

रमेश ने कहा कि रिजिजू के जवाब में मार्च 2026 में गृह मंत्री की कुछ दलों से सलाह-मशविरे का जिक्र है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि तब दिए गए भरोसे विधेयक में क्यों नहीं थे। उन्होंने तीन सवाल पूछे: क्या सरकार के पास किसी दल से चर्चा किया गया ठोस नया प्रस्ताव है; उसे "पारदर्शी तरीके से" रखने के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों टाली जा रही है; और क्या सरकार पराजित विधेयक फिर लाने का इरादा रखती है।

रिजिजू ने अपने पत्र में कहा कि परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण कानून के लिए सरकार ने लगातार विपक्ष का समर्थन मांगा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 16, 26 मार्च और 12 अप्रैल को खरगे को पत्र लिखे, मानसून सत्र में राहुल गांधी से मुलाकात की, और कांग्रेस के चर्चा की तारीखें न देने पर द्रमुक, समाजवादी पार्टी, वायएसआरसीपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजद से संपर्क किया।

महिला आरक्षण और परिसीमन को एक-दूसरे से जुड़ा विषय बताना सरकार का रुख है। विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन का प्रस्ताव सर्वदलीय चर्चा के बिना आगे बढ़ाया जा रहा है। इस साल अप्रैल में विधेयक के पराजय के बाद यह मुद्दा काफी समय तक शांत था।