महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत कदम उठाकर बड़ी राहत दी है। परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और संदिग्ध पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई गई है।
छात्रों के मन का संदेह पूरी तरह दूर हो, इसके लिए कड़े अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाने वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को इस समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। मुंबई हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति दिलीप भोसले इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और ठोस फैसलों के चलते पुणे में 10 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार संतोषजनक ढंग से वापस ले लिया गया है।
संवेदनशील नेतृत्व: फडणवीस की मध्यस्थता से 10 दिन के आंदोलन का सफल समापन पुणे में एस. एम. जोशी पुल के पास धरने पर बैठे उम्मीदवारों की भावनाओं को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद गंभीरता से लिया। छात्रों का नुकसान न हो, इसके लिए उन्होंने सरकारी स्तर पर तुरंत कदम उठाए और मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले को आंदोलनकारियों से सीधे बातचीत करने के निर्देश दिए। सरकार के सकारात्मक और ठोस रुख के कारण आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया।
पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की संरचना परीक्षा प्रणाली की तकनीकी और प्रशासनिक खामियां ढूंढकर पूरी प्रक्रिया में बदलाव के लिए यह समिति 60 दिनों (दो महीने) में सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी: न्यायमूर्ति दिलीप भोसले (पूर्व न्यायाधीश, मुंबई हाईकोर्ट), अध्यक्ष तुकाराम मुंढे (IAS), सचिव न्यायमूर्ति पी. डी. नाईक (पूर्व न्यायाधीश), सदस्य लक्ष्मी गौतम (IPS), सदस्य गणेश पाटील (पूर्व IAS अधिकारी), सदस्य
तुकाराम मुंढे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपकर मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि इस जांच में कोई समझौता नहीं होगा।
अध्यक्ष विवेक भीमनवार जांच पूरी होने तक छुट्टी पर पारदर्शी कामकाज पर जोर देने वाले मुख्यमंत्री के रुख के बाद एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने खुद पद के रोजमर्रा के कामकाज से दूर रहने और न्यायिक जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नैतिकता के आधार पर जांच निष्पक्ष हो, इसके लिए उन्होंने यह फैसला लिया है।
विद्यार्थियों के हित में फडणवीस सरकार के प्रमुख आश्वासन मेहनती छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा, इस भरोसे के साथ सरकार ने निम्नलिखित मुख्य मांगों पर तुरंत अमल के संकेत दिए हैं:
ग्रुप-C पदों में बढ़ोतरी: जनवरी में होने वाली ग्रुप-C परीक्षा के पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस: अपनी जायज मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पूरी पारदर्शिता और जांच-पड़ताल: एमपीएससी की पूरी कार्यप्रणाली को आधुनिक और त्रुटिरहित बनाया जाएगा। साथ ही अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पूरी पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड चेक) जांची जाएगी।
युवाओं के सपनों को ठेस न पहुंचे, इसके लिए देवेंद्र फडणवीस ने जो प्रशासनिक पकड़ और संवेदनशील फैसले लेने की क्षमता दिखाई है, उससे प्रतियोगी परीक्षा जगत में संतोष का माहौल बना है।