रायपुर : छत्तीसगढ़ में परिसीमन को लेकर विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की चर्चा शुरू हो गई है। अभी 90 सीटों वाली विधानसभा में करीब 50 फीसदी बढ़ोतरी कर 135 सीटें करने की संभावना जताई जा रही है। महिला आरक्षण का प्रावधान लागू होने पर इनमें से 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
महिला आरक्षण कानून के मुताबिक लोकसभा और विधानसभाओं में करीब एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाती हैं। छत्तीसगढ़ में 135 सीटें होने पर एक-तिहाई यानी 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, ऐसा गणित बताया जा रहा है। इससे भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दलों का चुनावी गणित बदल सकता है।
परिसीमन आयोग के पूर्व सदस्य सुशील त्रिवेदी ने हालांकि सावधानी बरती। उन्होंने कहा कि विधानसभा सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी की बात सामने आई है और 2011 की जनगणना को आधार बनाने का जिक्र है। “विधेयक के प्रावधान तय होने और विधायी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी,” उन्होंने साफ किया।
महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक यह आरक्षण जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा है। इसलिए सिर्फ सीटें बढ़ने से महिला आरक्षण अपने आप लागू नहीं होगा। फिलहाल यह सिर्फ संभावित गणना है और अंतिम फैसला कानूनी प्रावधानों व परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही होगा।
छत्तीसगढ़ में फिलहाल 90 विधानसभा सीटों में करीब 19 महिला विधायक हैं, यानी करीब 21 फीसदी प्रतिनिधित्व। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने 18 महिलाओं को टिकट दिया था। परिसीमन और महिला आरक्षण लागू होने पर सभी दलों को कम से कम एक-तिहाई महिलाओं को टिकट देना जरूरी होगा। इससे उमेदवार चयन का गणित पूरी तरह बदल जाएगा।