रायपुर: लेहरा बाई कभी स्कूल नहीं गईं। लेकिन पति की मौत के बाद उन्होंने जो कागजात संभाले, वे वकीलों के लिए भी आसान नहीं होते।
छत्तीसगढ़ की इस 35 वर्षीय महिला के पति श्रवण सूर्यवंशी ताम्रे को जनवरी 2024 में महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कुछ दिनों में ही उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोटें दर्ज हुई थीं। मौत की परिस्थितियों पर परिवार ने सवाल उठाए।
दो बच्चों की मां लेहरा बाई ने यह लड़ाई अकेले लड़ी। अधिकारियों के खिलाफ शिकायत, कागजी प्रक्रिया और आखिर में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना — यह सफर उन्होंने पूरा किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों के कामकाज पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताई। कोर्ट ने परिवार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया। CBI जांच के आदेश भी दिए गए। दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के निर्देश भी कोर्ट ने दिए।
इस मामले का कानूनी सवाल अहम है। हिरासत में हुई मौत की जिम्मेदारी राज्य की होती है — यह रुख कोर्ट ने अपनाया। शरीर पर चोटें थीं और वे हिरासत में ही आईं, यह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज था — यही बात कोर्ट के सामने निर्णायक रही।
आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अभी चल रही है। CBI जांच में आगे क्या निकलता है, इस पर मामले का अगला दौर टिका है।
लेहरा बाई के केस में एक बात साफ है — पढ़ाई न होने के बावजूद एक आम महिला ने जिस जिद से यह लड़ाई लड़ी, वह कई लोगों के लिए रास्ता दिखाती है।