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10 भारतीय भाषाओं में रियल-टाइम आवाज पहचानने वाला स्वदेशी एआई मॉडल; वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों को टक्कर देने का दावा

इंडियाएआई मिशन के सहयोग से बने स्टार्टअप चैरियट ने 'चैरियट-1-एएसआर रियलटाइम' नाम का आवाज पहचान मॉडल पेश किया। कंपनी का दावा है कि क्षेत्रीय लहजे, पृष्ठभूमि के शोर और मिश्रित भाषा वाली बातचीत संभालने वाला यह मॉडल गूगल और इलेवनलैब्स सहित वैश्विक मॉडलों से बेहतर है।

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नई दिल्ली: भारतीय भाषाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का आवाज तकनीक स्वदेशी बनाने की दिशा में एक कदम बढ़ा है। इंडियाएआई मिशन के सहयोग से काम कर रहे स्टार्टअप चैरियट ने 'चैरियट-1-एएसआर रियलटाइम' नाम का आवाज पहचान (स्पीच रिकग्निशन) मॉडल पेश किया है।

कंपनी के दावे के मुताबिक, यह मॉडल भारत की दस सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में गूगल, इलेवनलैब्स और भारतीय एआई डेवलपर्स के विशेष आवाज पहचान मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन करता है। कंपनी कहती है कि क्षेत्रीय लहजे, पृष्ठभूमि के शोर और हिंदी-अंग्रेजी जैसी मिश्रित बातचीत में भी यह सटीक काम करता है।

चैरियट के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्थ सारथी ने कहा, "अभी यह मुकाबला नीचे की ओर जा रहा है। हर वॉइस एआई कंपनी अपनी एएसआर प्रणाली बना रही है, क्योंकि उसे लगता है कि खुद का तकनीक होने पर मार्जिन ज्यादा मिलेगा।"

कंपनी ने 79 सार्वजनिक डेटासेट पर अपने मॉडल की जांच की। इनमें चुनौतीपूर्ण हालात में आवाज पहचान परखने वाले मानक भी शामिल थे। एनवीडिया के नीमो फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करते हुए चैरियट रियल-टाइम टेक्स्ट-टू-स्पीच के लिए 8 अरब पैरामीटर वाला मॉडल विकसित कर रही है।

सारथी ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस पढ़ा है और वे गूगल डीपमाइंड में काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्राथमिकता बुनियादी मॉडलों को बेहतर बनाना ही रहेगी।

आवाज पहचान तकनीक सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवा, ग्राहक सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सकती है। भारतीय भाषाओं के लिए स्वदेशी तकनीक बनने पर विदेशी मॉडलों पर निर्भरता घटेगी, ऐसा विशेषज्ञ मानते हैं।

आवाज तकनीक में मुकाबला दुनिया भर में बढ़ा है और कीमत बड़ा कारक बन गई है। कंपनियों को सस्ते और सटीक मॉडलों की जरूरत है। भारत में कई भाषाएं बोली जाती हैं, इसलिए मिश्रित भाषा वाली बातचीत संभालना चुनौतीपूर्ण होता है। सरकार के इंडियाएआई मिशन के तहत भाषा तकनीक पर खास जोर दिया जा रहा है। इस तकनीक का इस्तेमाल किसानों को सलाह, स्वास्थ्य जानकारी और बैंकिंग सेवाएं स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के लिए हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सटीक आवाज पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अगले दौर की बुनियादी जरूरत है।