नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लाया गया महाभियोग प्रस्ताव प्रक्रिया के तहत आएगा, ऐसा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा। यह बयान तब आया जब उनके खिलाफ मुहिम संसद से बाहर भी फैल रही है।
किसान संगठनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इससे अब तक राजनीतिक मंच से चल रहे विरोध को किसान मोर्चा भी जुड़ गया है। विपक्ष कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है और इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिल चुका है।
मामले की जड़ मतदाता सूची संशोधन यानी एसआईआर है। विपक्ष का आरोप है कि इसमें असली मतदाताओं को हटाया या चिह्नित किया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक मृत, पलायन कर चुके और दोहरी प्रविष्टियों को हटाना इस अभियान का मकसद है।
बिरला का बयान राजनीति से ज्यादा प्रक्रिया की ओर इशारा करता है। कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सिर्फ उसी आधार और तरीके से हटाया जा सकता है जो सुप्रीम कोर्ट के जज पर लागू होता है। यह शर्त ऊंची है और इसके लिए संसदीय प्रक्रिया जरूरी है।
यह मुहिम सड़क पर भी उतर चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने एसआईआर के विरोध में कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर के प्रदर्शन से जुड़े एक अलग मामले में पार्टी के नेता हिरासत में हैं।
चुनाव आयोग ने संशोधन का बचाव किया है और सरकार ने चुनाव संस्था के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है।
किसान संगठनों के पत्र से यह मांग पार्टियों से आगे सामाजिक स्तर पर फैल गई है। यह औपचारिक संसदीय कदम में बदलेगी या नहीं, यह अलग सवाल है। प्रक्रिया पर बिरला का जोर बताता है कि यह रास्ता धीमा रहेगा।