नई दिल्ली: कैंसर की दवाओं पर सोमवार से बड़ी कटौती हो रही है। राष्ट्रीय दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 137 अन-शेड्यूल्ड कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) के 30 फीसदी तक सीमित किया है। संशोधित दाम 9 नवंबर से लागू होंगे।
17 अक्टूबर की राजपत्र अधिसूचना के तहत यह कार्रवाई दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश 2013 के पैरा 19 के तहत की गई है। पेटेंट वाली दवाएं भी इसमें शामिल हैं। खुदरा कीमत और अस्पतालों को दिए जाने वाले दाम के बीच भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर यह कदम उठाया गया।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक अब तक 76 कंपनियों ने 121 दवाओं के 1,225 फॉर्मूलेशन के संशोधित एमआरपी जमा किए हैं। इनमें 1,031 फॉर्मूलेशन के दाम घटे हैं और 600 ब्रांडों में 50 फीसदी से ज्यादा कटौती हुई है। सबसे ज्यादा कटौती 96.45 फीसदी रही।
उदाहरण देखिए। जायडस लाइफसाइंसेज का बेवासिजुमैब 100 मिलीग्राम इंजेक्शन 25,995 रुपये से 3,318 रुपये पर आ गया। रिलायंस लाइफ साइंसेज का डेनोसुमैब 60 मिलीग्राम इंजेक्शन 24,955 से 6,240 रुपये हुआ। अर्विनकेयर फार्मा की अबिरेटेरोन एसीटेट 250 मिलीग्राम टैबलेट 41,250 से 3,218.23 रुपये पर आई। आरपीजी लाइफसाइंसेज की पाल्बोसिक्लिब 125 मिलीग्राम कैप्सूल 40,421.33 से 2,720 रुपये हो गई।
मंत्रालय का अनुमान है कि इससे मरीजों को सालाना करीब 3,502.31 करोड़ रुपये की बचत होगी। 10 से 15 दवाएं भारत में अभी बिकती नहीं हैं। बाजार में आने पर उन पर भी यही नियम लागू होगा।
हर खुदरा विक्रेता, वितरक, अस्पताल और संस्थान को संशोधित दरों की सूची अपने यहां और वेबसाइट पर लगानी होगी। राज्य औषधि नियंत्रक कार्यालय निगरानी रखेंगे। ग्राहक 'फार्मा सही दाम' ऐप से दाम जांच सकते हैं।
2019 में 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ऐसी ही कटौती हुई थी। तब 526 ब्रांडों के दाम 90 फीसदी तक घटे थे।