बेंगलुरु: पार्सल इतना छोटा था कि एक छोटी दुकान पर छोड़ा जा सके और उसमें रखी टॉर्च बिल्कुल आम दिखती थी। अब पुलिस का कहना है कि 20 अक्टूबर को जेरेमाया रोड की निर्माणाधीन इमारत की पांचवीं मंजिल पर हुआ धमाका आतंकवाद नहीं, पारिवारिक विवाद था, जो पटाखों के सामान और यूट्यूब के एक सबक से बना था।
शहर की पुलिस ने 27 साल के बेकरी सेल्समैन को गिरफ्तार किया है और उसके चाचा अल्लाउद्दीन एम. को निशाना बताया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक आरोपी के मन में संपत्ति और पैसे के विवाद के साथ बहन की शादी टूटने की कड़वाहट थी।
विस्फोटक यंत्र रायचूर में उसके दो बचपन के दोस्तों में से एक ने बनाया, जिसने कथित तौर पर मदद की। पटाखों से निकाला गया सामान विस्फोटक बना, उसे बिजली के सर्किट और छर्रों के साथ बैटरी में फिट किया गया और फिर टॉर्च के अंदर छिपा दिया गया। पार्सल उस इमारत के पास की छोटी दुकान पर रखा गया जहां अल्लाउद्दीन काम करते थे और आरोपी ने उन्हें बार-बार फोन करके खोलने का दबाव बनाया।
अल्लाउद्दीन खाना खा रहे थे। उन्होंने अपने साथी को पार्सल खोलने को कहा। पार्सल खुलते ही धमाका हुआ। अल्लाउद्दीन और उत्तर प्रदेश के सुरक्षा गार्ड सूरज कुमार गंभीर रूप से घायल हुए।
जांच शुरू में दूसरी दिशा में गई थी। IED के इस्तेमाल से राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी जांच में शामिल हुई और गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। पुलिस आयुक्त सीमंत कुमार सिंह ने बताया कि करीब 1,200 कर्मियों ने अलग-अलग टीमों में काम करके मामला सुलझाया और सुलझाने वालों के लिए 3 लाख रुपये का इनाम घोषित किया।
जांच में दो बातें साफ उभरती हैं। पहली, साजिश के लिए कितना कम हुनर काफी था: पटाखा दुकान और मोबाइल स्क्रीन से मिलने वाली चीजों से बना यंत्र। दूसरी, पार्सल पहुंचाने का तरीका। सीधे संपर्क की जगह दुकान के काउंटर और फोन के जरिए वह पहुंचा, इसीलिए देर तक निशाने को शक नहीं हुआ।
पुलिस ने यह नहीं बताया कि कौन सी धाराएं लगाई गईं और दोनों दोस्त गिरफ्तार हुए या नहीं। घायल सुरक्षा गार्ड की हालत भी नहीं बताई गई।
जेरेमाया रोड की इमारत पूर्वी बेंगलुरु के पुलकेशीनगर में है। धमाके के बाद वहां काम रुक गया है।