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चार्जशीट दाखल, इसलिए सीबीआई जांच नहीं: अयोध्या मंदिर चोरी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई

अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निपटा दी। कोर्ट ने कहा कि एसआईटी ने जांच कर चार्जशीट दाखल कर दी है। याचिकाकर्ताओं को मजिस्ट्रेट की मदद करने की इजाजत दी गई, गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई।

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नई दिल्ली : अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी की जांच अब मजिस्ट्रेट की अदालत में ही आगे बढ़ेगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने सोमवार को इस मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका और जुड़ी अन्य याचिकाएं निपटा दीं।

"उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट दाखल की है, जिसके मुताबिक अब इस मामले में चार्जशीट दाखल हो चुकी है। इसे देखते हुए हम यह याचिका और जुड़ी अन्य याचिकाएं निपटाते हैं और विद्वान ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक आगे कार्यवाही का निर्देश देते हैं," बेंच ने कहा।

"चूंकि इसमें जनहित का तत्व है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को उसी आधार पर मजिस्ट्रेट की मदद करने की छूट दी जाती है जिस आधार पर कानून अपराध के शिकार व्यक्ति को अदालत की मदद करने देता है," कोर्ट ने कहा।

बेंच ने साफ किया कि उसने "गुण-दोष पर कोई राय नहीं" जताई है ताकि किसी को कोई नुकसान न हो।

राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चोरी ज्यादातर गिनती के दौरान हुई। "गिनती करने वालों ने ही पैसे लिए हैं," उन्होंने कहा।

सीसीटीवी फुटेज सिर्फ सीमित समय के लिए था, ऐसा उन्होंने बताया। "हम पीछे गए। वे पैसे लेकर कहीं निवेश करते थे या बैंक खातों में जमा करते थे। इसलिए आरोपी कर्मचारियों के बैंक खाते जांचे और पुरानी तारीखों तक देखा कि कितनी रकम कब जमा हुई। वह आंकड़ा हमारे पास है। कुछ ने संपत्ति में निवेश किया है," उन्होंने कहा।

मेहता ने कहा कि ऑडिट भी हुआ और "सभी कलाकृतियां और सभी चढ़ावे सुरक्षित" मिले। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए कदम उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं की नई याचिका पर मेहता ने कहा कि वह दरअसल नवंबर 2019 के राम मंदिर भूमि विवाद फैसले की समीक्षा मांग रही है। हैरानी जताते हुए सीजेआई ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत दीवानी मुकदमे से रखनी चाहिए।

घटना के बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल बनाया था और उसने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखल की है। मामले की आगे की सुनवाई मजिस्ट्रेट की अदालत में होगी।