गुवाहाटी: गायक जुबीन गर्ग की मौत की पारदर्शी जांच की मांग को लेकर मंगलवार को दिसपुर के जनता भवन में असम सचिवालय के बाहर बनाई जा रही मानव श्रृंखला को पुलिस ने तोड़ दिया। इस दौरान राइजोर दल और कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के नेताओं समेत 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
आंदोलन की अगुवाई राइजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई की पार्टी ने की, साथ में केएमएसएस और छात्र मुक्ति संग्राम समिति थी। सुबह से ही सचिवालय के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई थी।
हिरासत में लिए गए लोगों में केएमएसएस महासचिव बिद्युत सैकिया, राइजोर दल के नेता वेदांत लस्कर और राकेश चक्रवर्ती, तथा कार्यकर्ता ज्ञानश्री बोरा शामिल हैं।
अधिकारियों ने जब सैकिया को ले जाना शुरू किया, तो उन्होंने मुख्यमंत्री पर सवाल दागे और एक केंद्रीय मंत्री का नाम लेकर उनका गायक की मौत से संबंध जोड़ने का आरोप लगाया। चक्रवर्ती ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक के बाद एक आरोपी को जमानत मिल रही है।
यह विरोध तब हुआ जब गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने गायक के चचेरे भाई संदीपन गर्ग और बैंड सदस्य अमृतप्रभा महंता समेत दो आरोपियों को जमानत दे दी। सोमवार को संदीपन गर्ग जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि त्योहारों के बीच मामले को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए और पारदर्शिता की मांग की। कलाकार मार्शल बरुआ ने कहा, "विरोध आज ही शुरू हुआ है और जुबीन दा को न्याय मिलने तक अनिश्चित काल तक जारी रहेगा।"
जनदबाव के बाद राज्य सरकार ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के जमानत आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।