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सियांग डैम विरोध के बाद पासीघाट में 250 जवान तैनात; 15 गिरफ्तार, पाबंदियां जारी

अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट के सियांग अपर प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा के बाद केंद्र ने सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां पासीघाट भेजी हैं। एनएचपीसी का दफ्तर और थाना जलाया गया था। 40 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हुए और 15 लोग गिरफ्तार हुए।

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पासीघाट: पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में शुक्रवार रात से चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद रविवार को भारी सुरक्षा तैनाती रही। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां — करीब 250 जवान — नवी मुंबई से वायुसेना के विमान से लाए गए।

विवाद 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट पर है, जिसे एनएचपीसी लिमिटेड बना रहा है। स्थानीय आदिवासी संगठन और युवा इसका विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि जलाशय से गांव डूब जाएंगे और नदी से उनका रिश्ता टूट जाएगा।

पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को 12 घंटे के बंद के बाद पासीघाट में हिंसा भड़की और वह शनिवार तड़के 3.30 बजे तक चली। भीड़ ने एनएचपीसी का दफ्तर और एक थाना जलाया, आदि बाने केबांग का दफ्तर तोड़ा और पासीघाट पश्चिम के विधायक निनोंग एरिंग, मारियांग-गेकू के विधायक ओनी पान्यांग तथा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कालिंग मोयोंग के घरों में तोड़फोड़ की।

पुलिस महानिरीक्षक (मध्य क्षेत्र) हिबू तमांग ने बताया कि 40 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हुए, जिनमें एक पुलिस उपाधीक्षक भी है, जिन्हें सिर में चोट लगने पर डिब्रूगढ़ भेजना पड़ा। नौ पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए।

तमांग के मुताबिक हिंसा, आगजनी और सुरक्षाकर्मियों पर हमलों से जुड़े छह मामले दर्ज हुए हैं और कम से कम 15 लोग गिरफ्तार हुए हैं। और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा, "हिंसा भड़काने में शामिल लोगों की पहचान के लिए जांच चल रही है।"

पूर्वी सियांग की प्रभारी जिलाधिकारी जयंती पर्तिन ने बताया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नुकसान का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि पासीघाट, मेबो और रुक्सिन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत सार्वजनिक जमाव पर पाबंदी अगले आदेश तक जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन वह कानून की सीमा में रहना चाहिए। उन्होंने एक्स पर लिखा, "प्रोजेक्ट को लेकर गलत जानकारी और भ्रम लोगों में डर पैदा कर रहे हैं। तथ्यों, पारदर्शिता और बातचीत से यह दूरी पाटनी जरूरी है।"

प्रदर्शनकारियों की मांगें हैं — गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित गांव प्रधानों की बहाली, प्रोजेक्ट के प्री-फिजिबिलिटी कामों पर रोक और सियांग घाटी से अर्धसैनिक व केंद्रीय बलों की वापसी।

विरोध कर रहे 'आदि बाने केबांग यूनाइटेड', 'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम' और 'एसयूएमपी अफेक्टेड एरिया यूथ असोसिएशन' का कहना है कि जलाशय से 35 गांव डूब सकते हैं और डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि यह प्रोजेक्ट चीन के यारलुंग सांगपो पर बन रहे बड़े बांध का जवाब है और बाढ़ नियंत्रण में मदद करेगा।

9 अक्टूबर से कम से कम 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें से चार को अरुणाचल प्रदेश अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2014 के तहत हिरासत में रखा गया है।

रविवार शाम पासीघाट में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और पाबंदियां जारी रहीं।