अमरावती : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य की 100 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया राज्य चुनाव आयोग द्वारा अस्थायी रूप से रोके जाने के बाद मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने गुरुवार सुबह उंडवल्ली स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकात की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पी. वी. एन. माधव भी बैठक में मौजूद रहे।
खास बात यह रही कि पवन कल्याण बिना काफिले और सुरक्षाकर्मियों के मुख्यमंत्री के घर पहुंचे। करीब आधे घंटे चली बैठक में मुख्य रूप से इस पर चर्चा हुई कि चुनाव आगे कैसे बढ़ाए जाएं। बागी उम्मीदवारों के मुद्दे पर भी बात हुई, ऐसा बताया जाता है।
सीटों का तालमेल पूरा होने के बावजूद तीनों दलों में टिकट न मिलने वाले नेता बागी के तौर पर मैदान में हैं। एक दल को आवंटित सीट पर सहयोगी दल के नेता ही चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे गठबंधन के वोट बंटने की आशंका है। नेताओं ने बागियों को मनाकर चुनाव से हटाने का फैसला किया है, ऐसा पता चला है।
इससे पहले बुधवार आधी रात को चंद्रबाबू, पवन कल्याण और माधव ने संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि वे राज्य चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी पहले दिन से स्थानीय चुनाव रोकने की कोशिश कर रही है और अदालतों में दर्जनों याचिकाएं दायर कर विकास में बाधा डाल रही है।
राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों का नया कार्यक्रम कब आएगा, यह चुनाव आयोग के अगले फैसले पर निर्भर करेगा।
गठबंधन सहयोगियों ने पहले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए सीट-बंटवारा घोषित किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से कार्यक्रम पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने कहा कि नया कार्यक्रम जारी करने से पहले स्थिति साफ होने का इंतजार किया जाएगा। सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए प्राथमिकता अपना वोट बरकरार रखना और ऐसी फूट से बचना है जिससे शहरी वार्डों में विपक्ष को फायदा मिले।