लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में 12 दिसंबर को जाने का ऐलान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया है. उनका यह पहला दौरा होगा.
तारीख सामने आते ही यूपी की सियासत गरमा गई. एटावा में केदारेश्वर धाम प्रोजेक्ट पूरा होने के कार्यक्रम से यह तारीख जोड़ी गई है. 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रही इस यात्रा का राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है.
सपा का कहना है कि यह धार्मिक मामला है. पार्टी ने ऐसे दौरों पर पहले साफ रुख नहीं रखा था, लेकिन इस बार अखिलेश ने खुद तारीख का ऐलान किया.
भाजपा ने इसे चुनावी रणनीति बताया है. पार्टी का आरोप है कि अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का पुराना ठप्पा मिटाने और यादवेतर ओबीसी तथा सवर्ण वोटरों तक पहुंचने के लिए यह दौरा तय किया गया.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अखिलेश पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में समाजवादी पार्टी की भूमिका और रामभक्तों के खिलाफ कार्रवाइयों के लिए पहले माफी मांगी जानी चाहिए. धर्म को सियासी हथियार बनाने की भी उन्होंने निंदा की. भाजपा के दूसरे नेताओं ने भी यही तेवर दिखाया.
दौरे को देखते हुए राम मंदिर परिसर में प्रशासनिक तैयारियां शुरू होने की बात कही जा रही है. कार्यक्रम का शेड्यूल और किससे मुलाकात होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी नहीं आई है.
2027 से पहले यूपी में धार्मिक स्थलों के दौरे सियासी चर्चा का केंद्र बन रहे हैं. इससे पहले कई दलों के नेता अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों में जा चुके हैं. अखिलेश का दौरा पहला है, इसलिए उसकी चर्चा बड़ी है.
समाजवादी पार्टी पहले अयोध्या के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखती थी. अब पार्टी प्रमुख के खुद तारीख तय करने से पार्टी के भीतर भी हलचल है. 12 दिसंबर को अखिलेश क्या कहते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी.