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एआई और डिजिटल नवाचार से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी

राज्य सरकार एआई, ई-गवर्नेंस और डिजिटल नवाचार के जरिए प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाना चाहती है। टेक महाइम्पॅक्ट 2026 में विशेषज्ञों ने इसके अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की।

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टेक महाइम्पॅक्ट 2026 परिषद में एआई और ई-गवर्नेंस पर परिसंवाद

मुंबई, 20: राज्य सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ई-गवर्नेंस और डिजिटल नवाचार के जरिए अर्थव्यवस्था को और रफ्तार देने पर जोर दिया है। साथ ही प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने का संकल्प दोहराया गया। 'Powering Maharashtra's Economy through AI, E-Governance and Digital Innovation' विषय के परिसंवाद में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने डिजिटल बदलाव के अवसरों और चुनौतियों पर गहराई से चर्चा की।

यह परिसंवाद 'टेक महाइम्पॅक्ट 2026' परिषद का हिस्सा था, जो तकनीक, नवाचार, डिजिटल गवर्नेंस और CSR पर केंद्रित है। इसके पहले सत्र में, जो AI, ई-गवर्नेंस और डिजिटल नवाचार से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित था, डॉ. ज्ञानेश्वर मुले, भुवनेश्वरी एस, अजय प्रसाद श्रीवास्तव, अभिषेक लाहिरी, के. वेंकटेशम, अवर्तन बोकील और भगवान पाटील ने हिस्सा लिया।

राज्य सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग की आयुक्त भुवनेश्वरी एस. ने बताया कि सरकार केवल कागजों का डिजिटलीकरण नहीं कर रही, बल्कि पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के डिजिटलीकरण और 'गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग' पर काम कर रही है। विभिन्न विभागों के डेटाबेस API इंटीग्रेशन के जरिए आपस में जोड़े जा रहे हैं, जिससे नागरिकों के लिए सेवाएं पाने की प्रक्रिया आसान होगी। उन्होंने कहा कि AI एनालिटिक्स की मदद से समस्याएं पैदा होने से पहले ही उनका अंदाजा लगाकर डेटा-आधारित फैसले लेने की प्रक्रिया मजबूत करने का लक्ष्य है।

डॉ. ज्ञानेश्वर मुले फाउंडेशन के संस्थापक और पूर्व IFS अधिकारी ज्ञानेश्वर मुले ने कहा कि तकनीक लागू करने से पहले समस्या का सटीक विश्लेषण जरूरी है। दिल्ली में पासपोर्ट सेवाओं को सरल बनाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक का मकसद नागरिकों का जीवन आसान बनाना होना चाहिए। उनके अनुसार CSR 2.0 के जरिए तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ व्यवस्था सुधारने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और आखिरी नागरिक तक लाभ पहुंचाने के लिए होना चाहिए।

बृहस्पती टेक्नॉलॉजीज लिमिटेड के निदेशक और पूर्व पुलिस अधिकारी के. वेंकटेशम ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में AI से बड़े बदलाव आएंगे। उन्होंने बताया कि छात्रों की निजी जरूरतों के अनुसार AI की मदद से शैक्षणिक वीडियो और ग्राफिक्स तैयार किए जा सकेंगे।

STPI पुणे के निदेशक अजय प्रसाद श्रीवास्तव ने कृषि क्षेत्र में AI के इस्तेमाल की जानकारी दी और चीनी उद्योग के लिए विकसित एक ऐप का जिक्र किया। यह ऐप AI की मदद से गन्ना कटाई का सही समय तय करता है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों का नुकसान कम होने में मदद मिल रही है और चीनी कारखानों पर भीड़ का प्रबंधन भी आसान हो रहा है।

आयर्न माउंटन इंडिया के चीफ ऑफ ग्रोथ बिजनेस अभिषेक लाहिरी ने कहा कि सरकारी योजनाओं में AI का इस्तेमाल करते समय पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सबसे अहम है। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन में भरोसा बनाने के लिए 'एक्सप्लेनेबल AI' की अवधारणा जरूरी है।

आयर्न माउंटन इंडिया के अवर्तन बोकील ने कहा कि भविष्य में तकनीक की रफ्तार और बढ़ेगी, इसलिए डिजिटल बदलाव की शुरुआत ग्रामीण इलाकों से करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि CSR और तकनीक के बीच प्रभावी तालमेल से व्यापक सामाजिक बदलाव लाए जा सकते हैं।

परिसंवाद में यह स्पष्ट हुआ कि महाराष्ट्र सरकार और 'महाआईटी' प्रशासन में AI के प्रभावी इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ाने, सेवा वितरण को और कुशल बनाने और नागरिकों के 'इज़ ऑफ लिविंग' को बेहतर करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।